माहे रमजान का महीना सबसे पवित्र महीना , रोजेदारों के सब्र का कड़ा इम्तेहान
माहे रमजान के तीसरे असरे में एतकाफ में बैठ कर ,करे अपने गुनाहों की तौबा
काछोला 13 मार्च मार्च-स्मार्ट हलचल|रमजान के महीने को लेकर मुस्लिम समुदाय उत्साह देखने को मिल रहा है। जहां बच्चे ,महिलाएं,बुजुर्ग एवं नोजवान मोमीन का रमजान माह शुरू होते ही रोजेदारों के सब्र का कड़ा इम्तेहान चल रहा है ।
तथा भीषण गर्मी और उमस भरे मौसम में पड़ने वाले रमजान का कोई भी रोजा 11 से 12 घंटे से कम का नहीं होता है।
जामा मस्जिद काछोला में तरावीह कि नमाज पढ़ा रहे मौलाना मोहम्मद शाह आलम अशरफी ने बताया कि हर बार आखिरी के रोजे से पहले की अपेक्षा तुलना से छोटे थे लेकिन इस बार रमजान के आखिरी तक रोजे का समय बढ़ता ही जाएगा। उन्होंने बताया कि गुनाहों से तोबा कर अल्लाह की इबादत करने का खासा महीना है।।
उन्होंने ने रमजान महीने के बारे बताते हुए कहा कि रमजान महीने का रोजा कोई इंसान बिना किसी वाजिब वजह के छोड़ दे तो वह पूरी जिन्दगी रोजा रखकर भी उसका सवाब नहीं पा सकता है। रोजे का मतलब होता है कि तकवा, तकवा यानि अपने आप को बुराइयों से बचाते हुए भलाई का अपनाना इंसान रोजा रखकर ऐसा बनने कोशिश करता है, जैसे उसे रब चाहता हो रमजान का महीना बेहद पाक व रहमतों वाला होता है।
मौलाना शाह आलम ने बताया कि रोजा इसलिए रखा जाता है कि भूख प्यास, का एहसास हो और लोग अपने मन पर काबू करना सीख सके। ऐसे करने से आपको दूसरों की भूख का भी एहसास हो सके।
जहां रमजान के महीने में कुरान-ए-पाक शरीफ, आन-बान,मान और शान से उतारी गई थी। इसलिए रमजान का महीना इस्लाम मजहब से सबसे पाक, पवित्र एवं कुरान का महीना भी कहा जाता है। रमजान के महीने में अल्लाह बंदों के लिए रहमतों के दरवाजे खोल देता है,उनकी झोली भर देता है और जहन्नुम के दरवाजे बंद कर देता है।अपने गुनाहों की माफी व तौबा के लिए आने वाले तीसरे असरे 21 से 30 यानी दस दिन मस्जिद में एतकाफ में बैठ अपने गुनाहों की माफी मांगे और काफी इबादत करे और शबे कद्र की ताक रातों 21 वी,23 वी,25 वी,27 वी,29 वी शबे कद्र पर इबादत करें।
वही गरीबो,यतीमो और जरूरत मन्दो के लिए सदका,फितरा अदा करे जिससे वो भी अपनी ईद खुशी से मना सके।
