बालिकाओं ने नाटक के जरिए भरी हुंकार— “बाल विवाह मुक्त भारत” का दिया संदेश

अनिल कुमार

 

ब्यावर। स्मार्ट हलचल|महिला अधिकारिता विभाग के पन्नाधाय सुरक्षा सम्मान केंद्र द्वारा आयोजित “पन्नाधाय सुरक्षा व जागृति सप्ताह” के तहत सोमवार को राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, शाहपुरा मोहल्ला में एक भव्य कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस आयोजन का मुख्य केंद्र “बाल विवाह मुक्त भारत” अभियान रहा, जिसमें बालिकाओं ने कला और संवाद के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों पर कड़ा प्रहार किया।

*नाट्य रूपांतरण ने झकझोरा समाज को*
कार्यक्रम का सबसे आकर्षक हिस्सा विद्यालय की छात्राओं द्वारा प्रस्तुत किया गया नाट्य रूपांतरण रहा। इस नाटक के माध्यम से बालिकाओं ने यह दर्शाया कि किस तरह बाल विवाह न केवल एक मासूम का बचपन छीन लेता है, बल्कि उसके शारीरिक और मानसिक विकास पर भी गहरा आघात करता है। नाटक के भावुक और प्रेरणादायक दृश्यों ने वहां मौजूद जनसमुदाय और छात्राओं को सोचने पर मजबूर कर दिया।

*कुरीतियों के विरुद्ध सामूहिक संकल्प*
कार्यक्रम में सामाजिक परामर्शदाता कविता ने भी एक सशक्त नाट्य प्रस्तुति दी, जिसने समाज में व्याप्त पुरानी बेड़ियों को तोड़ने का संदेश दिया। इस अवसर पर उपस्थित सभी बालिकाओं और नागरिकों को बाल विवाह के विरुद्ध शपथ दिलाई गई कि वे न तो स्वयं इस कुरीति का हिस्सा बनेंगे और न ही अपने आस-पास ऐसा होने देंगे।

*विशेषज्ञों के विचार*
बरखा दगदी (केंद्र प्रबंधक): उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि “बाल विवाह जैसी बुराई को केवल कानून से नहीं, बल्कि सामूहिक इच्छाशक्ति और जागरूकता से ही समाप्त किया जा सकता है।”

सुनीता चौधरी (प्राचार्य): कार्यक्रम के समापन पर उन्होंने एक ओजस्वी कविता पढ़ी, जिसने छात्राओं में जोश भर दिया।

*सफल आयोजन की टीम*
इस पूरे कार्यक्रम की रूपरेखा उर्मिला कवरिया और दीपिका द्वारा तैयार की गई। विद्यालय प्रशासन और महिला अधिकारिता विभाग के साझा प्रयासों से यह कार्यक्रम क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

*मुख्य संदेश: “शिक्षित बेटी, सशक्त समाज— बाल विवाह का पूर्ण बहिष्कार ही है विकास का आधार* ।”