चित्तौड़ से भीलवाड़ा एंट्री पर कारोई में रोड खस्ताहाल

सांवरिया सेठ जाने वाले श्रद्धालु भी परेशान, गड्ढों से राहगीर बेहाल

डामर के नाम पर सिर्फ मिट्टी, बरसात में दलदल बना दो जिलों को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग PWD और प्रशासन से तुरंत डामरीकरण की मांग

गुरला:-स्मार्ट हलचल|चित्तौड़गढ़ जिले से भीलवाड़ा जिले में प्रवेश करते ही कारोई कस्बे में सांवरिया सेठ जाने वाला मुख्य मार्ग पूरी तरह उजड़ चुका है। फोटो में साफ देखा जा सकता है कि सड़क पर डामर नहीं है, सिर्फ पीली मिट्टी डली हुई है। बरसात होते ही पूरी सड़क कीचड़ और दलदल में बदल गई है। जगह-जगह गहरे गड्ढों में पानी भरा है और ट्रक-बाइक फंस रहे हैं। दो जिलों को जोड़ने वाला और सांवरिया सेठ जाने वाला ये महत्वपूर्ण मार्ग जर्जर होने से हजारों राहगीर, श्रद्धालु और ग्रामीण परेशान हो रहे हैं।

*पीली मिट्टी से बना दलदल, आवागमन ठप*
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस सड़क पर पिछले कई सालों से पक्का डामर नहीं बना है। चुनाव के समय सिर्फ खानापूर्ति के लिए पीली मिट्टी डालकर छोड़ दिया गया। अब 2-3 दिन की बारिश में ही सड़क पूरी तरह कीचड़ में तब्दील हो जाती है।

कार बस ट्रक एंबुलेंस कीचड़ में धीरे-धीरे निकलते है। बाइक सवार को भी पैर नीचे टिकाकर संतुलन बनाकर चलना पड़ रहा है। दोपहिया वाहन चालक आए दिन फिसलकर गिर रहे हैं। ग्रामीण ने बताया _”साहब ये पीली मिट्टी वाली सड़क है। एक बार बारिश हो जाए तो 15 दिन तक कीचड़ नहीं सूखता। पैदल चलना भी मुश्किल है। जूते-चप्पल सब खराब हो जाते हैं।”_

*सांवरिया सेठ के श्रद्धालु सबसे ज्यादा परेशान*
भीलवाड़ा कारोई गुरला पुर पहुंना राशमी गिलुंड मांत्रिकुंडया से आने जाने वाले हजारों श्रद्धालुओं के लिए *सांवरिया सेठ, मंडफिया* जाने का मुख्य रास्ता है। दूर-दूर से दर्शन को आने वाले बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे इस खस्ता सड़क के कारण सबसे ज्यादा परेशान हैं। बस और निजी वाहन झटके खाते हुए चलते हैं जिससे बीमार लोगों की तकलीफ बढ़ जाती है। “धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की बात करते हैं लेकिन श्रद्धालुओं के लिए रास्ता ही नहीं है। बाहर से आने वाले लोग पहली बार में ही सड़क देखकर नाराज हो जाते हैं।”
*दो जिलों का संपर्क टूटा, एंबुलेंस भी फंस रही*
ये सड़क चित्तौड़गढ़ और भीलवाड़ा दोनों जिलों को जोड़ती है। रोडवेज, स्कूल बस, एंबुलेंस और मालवाहक वाहन इसी मार्ग से गुजरते हैं। खराब सड़क के कारण बसें 15-20 मिनट लेट हो ती हैं। सबसे बड़ी समस्या मरीजों को है। भीलवाड़ा जाने वाली 108 एंबुलेंस कीचड़ के कारण समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पा रही।
कारोई ग्रामीण ने ने बताया _”किसान अपनी फसल ट्रैक्टर-ट्रॉली में भरकर कारोई गांव लाते हैं। गड्ढों में ट्रॉली पलटने का डर रहता है। चित्तौड़गढ़ के ग्राहक भी सड़क खराब होने से कारोई आना बंद कर चुके टैक्स सब देते हैं लेकिन सुविधा के नाम पर जीरो। नेताओं को चुनाव में याद आती है, बाद में कोई देखने नहीं आता।”_