ओम जैन
शंभूपुरा।स्मार्ट हलचल| चित्तौड़गढ़ स्थित विश्व प्रसिद्ध दुर्ग हमारी विरासत भी है और हमारी पहचान भी है लेकिन अगर जिम्मेदारों की बेरुखी के कारण यह विलुप्त होते या खतरे में नजर आए तो हम सबके लिए यह बहुत दुःखद बात है।
ऐसा ही कुछ अभी हो रहा हमारे विश्व प्रसिद्ध चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर जो अपने हजारो साल पुराने इतिहास, विरासत, वीरता, शक्ति और भक्ति के लिए जाना जाता है लेकिन पिछले कुछ समय से यहाँ के हाल कुछ ऐसे हो गए कि पर्यटक आते तो है लेकिन अपने अंदर खुशियों की जगह दर्द लेकर जाते है, यहाँ के बिगड़ते यातायात व्यवस्था के कारण आमजन ओर पयर्टकों को ऊपर जाने आने में खासी परेशानी हो रही है, यह बात नई नही है आये दिन ये हालात बन रहे है, जिसकी खबरे अखबारों और चैनलों की हेडलाइन बन रही है बावजूद इसके सुधार के कोई खास इंतजाम करने के बजाय स्थानीय प्रसासन हाथ पर हाथ धरे बैठे है, जिम्मेदारों की बेरुखी का खामियाजा अभी तो आमजन ओर पर्यटक ही भुगत रहे लेकिन हालात यही रहे तो आने वाले समय मे पूरे चित्तौड़गढ़ को भुगतना पड़ेगा खासकर दुर्ग से जुड़े उन लोगो को जो यहाँ से जुड़े होकर काम धंधा कर अपना घर चला रहे है जिनमे ऑटो चालक, रेवड़ी वाले, माला प्रसाद, होटल, फोटोग्राफर, गाइड आदि जिनको इस सब का बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ सकता है, समय रहते जिम्मेदारों ने इस गम्भीर समस्या पर ध्यान नही दिया तो इसका परिणाम सही नही होने वाला है, हाल ही में बढ़ते ट्रेफिक के चलते शहरभर में भी चर्चा तेज है कि दुर्ग ओर जिला प्रशासन को जल्द से जल्द ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने की आवश्यकता है।













