चित्तौड़गढ़।स्मार्ट हलचल|केंद्र सरकार की श्रमिक, कर्मचारी, किसान एवं आमजन विरोधी नीतियों के विरोध में केंद्रीय श्रम संयुक्त श्रम संगठन, राजस्थान जिला चित्तौड़गढ़ के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को श्रमिक संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद जिला कलेक्टर कार्यालय के माध्यम से राष्ट्रपति महोदय के नाम 11 सूत्रीय मांग-पत्र सौंपा गया।
मांग-पत्र में चार श्रम संहिताओं को रद्द करने, सभी श्रम कानूनों को बहाल करने, मनरेगा को पुनः बहाल कर 200 दिन रोजगार देने, न्यूनतम वेतन ₹30,000 प्रतिमाह लागू करने, बिजली के निजीकरण पर रोक लगाने, अग्निवीर योजना समाप्त करने, पुरानी पेंशन योजना लागू करने, ठेका एवं संविदा कर्मचारियों को स्थायी करने तथा रिक्त पदों पर स्थायी नियुक्तियां करने सहित विभिन्न मांगें प्रमुखता से उठाई गईं।
बिजली कर्मचारी संघ इंटक से शुभम श्रीवास्तव ने जानकारी देते हुए बताया कि यह आंदोलन केवल ज्ञापन देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के मेहनतकश श्रमिकों और कर्मचारियों के अधिकारों की बुलंद आवाज है। उन्होंने कहा कि श्रमिक और कर्मचारी देश की अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव हैं तथा उनके अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। संयुक्त श्रम संगठनों की एकजुटता के साथ श्रमिक हितों की यह लड़ाई आगे भी मजबूती से जारी रहेगी।
कार्यक्रम में इंटक जिला अध्यक्ष सत्यनारायण मेनारिया, सीटू से कालूराम सुथार, वीर सिंह राठौड़ (चित्तौड़ सीमेंट वर्क्स), प्रांतीय विद्युत मंडल मजदूर फेडरेशन के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष विमलचंद जैन, बिजली कर्मचारी संघ इंटक जिला चित्तौड़गढ़ के अध्यक्ष जितेंद्र मीणा एवं महामंत्री जाकिर हुसैन सहित विभिन्न श्रम संगठनों के पदाधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
वहीं आशा सहयोगिनी कर्मचारी संघ की विभिन्न महिला कर्मचारियों ने भी बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई। महिला शक्ति की उत्साहपूर्ण मौजूदगी ने कार्यक्रम को और मजबूती प्रदान की तथा श्रमिक एकता का संदेश दिया।
कार्यक्रम के दौरान श्रमिकों ने एकजुट होकर अपनी मांगों के समर्थन में जोरदार नारेबाजी की और सरकार से श्रमिक एवं कर्मचारी हितों में आवश्यक कदम उठाने की मांग की।
