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डॉ. अरुण नागरथ के निधन पर उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई में शोक की लहर

(सुघर सिंह सैफई)

सैफई( इटावा) उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, सैफई के पूर्व निदेशक एवं प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. अरुण नागरथ के निधन की खबर से उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई में शोक की लहर क्लियर दौड़ गई। उनके निधन से चिकित्सा शिक्षा, शोध एवं रोगी-सेवा के क्षेत्र को अपूरणीय क्षति पहुँची है।प्रशासनिक भवन में आयोजित शोक सभा में शोक सभा में कुलपति प्रो० डॉ अजय सिंह ने शोक संदेश पढ़ते हुए गहरी संवेदनाओं को व्यक्त करते हुए स्वर्गीय डॉ. अरुण नागरथ को श्रद्धांजलि दी, इस अवसर पर सभी संकाय सदस्य और प्रसूति एवं स्त्रीरोग विभाग के सभी संकाय सदस्यों ने पुष्पांजलि अर्पित कर डॉ अरुण नागरथ को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

प्रोफेसर डॉक्टर वैभव कांति ने बताया कि डॉ. नागरथ ने 01 जुलाई 2009 को प्रोफेसर के रूप में यूपीयूएमएस में अपनी सेवाओं की शुरुआत की और 03 नवंबर 2018 तक अपने उत्कृष्ट ज्ञान, अनुभव और समर्पण से संस्थान की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने 20 नवंबर 2012 से 30 दिसंबर 2012 तक कार्यवाहक निदेशक का दायित्व संभालकर अपने उत्कृष्ट प्रशासनिक कौशल एवं नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया जिससे संस्थान की शैक्षणिक गुणवत्ता और व्यवस्थागत दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

एक कुशल सर्जन, उत्कृष्ट शिक्षक और प्रेरणादायी नेतृत्वकर्ता के रूप में डॉ. नागरथ का व्यक्तित्व अत्यंत सम्मानित रहा। एस.एन. मेडिकल कॉलेज, आगरा से एमबीबीएस (1972) एवं एमएस (1975) पूर्ण करने के बाद उन्होंने लंबे समय तक प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष के रूप में सेवाएँ दीं और अपने अकादमिक जीवन में 100 से अधिक स्त्रीरोग विशेषज्ञों को शोध-निर्देशन प्रदान कर चिकित्सा जगत को समृद्ध किया।

इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष सुघर सिंह पत्रकार ने डॉक्टर अरुण नागरथ के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा है कि डॉक्टर अरुण नागरथ ने कई महिलाओं का जीवन बचाया है। आजकल के डॉक्टर जरा सी बीमारी में बच्चेदानी को बाहर निकाल कर महिलाओं का जीवन बर्बाद कर देते हैं लेकिन डॉक्टर अरुण नागरथ महिलाओं के इलाज में बहुत माहिर थे और देश के प्रसिद्ध चिकित्सक थे। हजारों महिलाओं को उन्होंने नया जीवन दिया है। उनकी सोच थी कि जब इलाज से ही बच्चेदानी का रोग ठीक हो जाये तो बच्चेदानी को क्यों निकाला जाए। उनके निधन पर अपूरणीय क्षति हुई है।

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