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कोंग्रेस ने सिसोदिया को जिलाध्यक्ष बनाया लेकिन ना जिले के नेता स्वीकार रहे ना कार्यकर्ता

शपथ ग्रहण में जिले के बड़े नेता ओर सभी पूर्व विधायक रहे दूर।

ओम जैन

शंभूपुरा।स्मार्ट हलचल|चित्तौड़गढ़ जिले के पूर्व विधायक, वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं की बिना रायसुमारी के कोंग्रेस ने चित्तौड़गढ़ में प्रमोद सिसोदिया को जिलाध्यक्ष तो बना दिया लेकिन अभी तक ना उनके साथ कोई आये ना ही शपथ ग्रहण में भाग लिया इससे जिले के सभी बड़े नेताओं और पूर्व विधायको की नाराजगी जग जाहिर हो गई है।
रविवार को प्रमोद सिसोदिया ने पदभार ग्रहण करते हुए जिले की कमान तो सम्भाल ली है लेकिन उनको जिलाध्यक्ष बनाये जाने से नाराज कोंग्रेसियों को वो नही सम्भाल पाए है।
उनके शपथ ग्रहण कार्यक्रम में मुख्यतः देखा जाए तो पूर्व विधायक निम्बाहेड़ा से उदयलाल आंजना को छोड़ दो तो बाकी अन्य सभी विधानसभा से ना कोई पूर्व विधायक आये ना ही उनके समर्थक ना ब्लॉक अध्यक्ष, ना पदाधिकारी, ना ही जनप्रतिनिधि आये, ऐसा शपथ ग्रहण समारोह पहला ही होगा जो इतने पूर्व विधायको ओर जिले भर के हजारो जनप्रतिनिधियों कार्यकर्ताओ की नाराजगी ओर अनुपस्थिति के हुआ हो।

पोस्टर में फ़ोटो लेकिन साथ कोई नही

सिसोदिया के शपथ ग्रहण समारोह में लगे पोस्टर में तो सभी पूर्व विधायको ओर निवर्तमान जिलाध्यक्ष का फोटो तो लग रहा था लेकिन ये कोई भी सिसोदिया के साथ नही होने से इन सबके बिना ही सिसोदिया को सिर्फ आंजना की उपस्थिति में कमान संभालनी पड़ी।

मुख्यतः यह रहे अनुपस्थित जो बना चर्चा का विषय

सिसोदिया के शपथ ग्रहण समारोह में अनुपस्थित नेताओं की बात करे तो लिस्ट लम्बी है लेकिन मुख्यतः निवर्तमान जिलाध्यक्ष भेरूलाल चोधरी, पूर्व मंत्री सुरेंद्र सिंह जाड़ावत, बेंगु से पूर्व विधायक राजेन्द्र सिंह विधूड़ी, बड़ीसादड़ी से पूर्व विधायक प्रकाश चोधरी, कपासन से पूर्व विधायक शंकरलाल बैरवा सहित इनके करीबी, जिले के कई बड़े नेता, जनप्रतिनिधि, ब्लॉक अध्यक्ष, पदाधिकारी एवं अधिकांश कार्यकर्ता इस कार्यक्रम से नदारद रहे जो पूरे कार्यक्रम में चर्चा का विषय बन गया।

नाम कि घोषणा के साथ ही जिले में घुटबाजी तेज

वैसे कार्यक्रम में इन सबकी अनुपस्थिति चर्चा का विषय जरूर रही लेकिन स्थिति चोंकाने वाली नही थी क्योकि जिस दिन कोंग्रेस आलाकमान ने प्रमोद सिसोदिया को जिलाध्यक्ष बनाया उसी दिन से सबकि नाराजगी जग जाहिर हो गई, इसलिए इस शपथ ग्रहण समारोह से दूरी तो पहले ही साफ नजर आ रही थी, लेकिन इस समारोह में इन सबके नदारद रहने से सिसोदिया की मुश्किलें ओर अधिक बढ़ गई है, अब उनका इन सबको साथ लेकर चलना मुश्किल नजर आ रहा है जिसका सीधा सीधा नुकसान पार्टी को आगामी चुनावों में झेलना पड़ सकता है।

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