संगति अच्छी तो जीवन अच्छा- आचार्य महाश्रमण

Consistency Good - Life's Good

पूज्यप्रवर ने बताई संत दर्शन की महत्ता

चित्तौड़ से भीलवाड़ा जिले में शांतिदूत का मंगल प्रवेश

स्मार्ट हलचल, पंकज पोरवाल
भीलवाड़ा। सद्भावना के संदेश के साथ देश-विदेश में हजारों किलोमीटर की पदयात्रा कर शांति, अहिंसा का संदेश देने वाले परमपूज्य शांतिदूत आचार्य श्री महाश्रमण जी का अपनी अहिंसा यात्रा के साथ आज भीलवाड़ा जिला में मंगल प्रवेश हुआ। प्रातः गंगरार से पूज्यप्रवर ने मंगल प्रस्थान किया। स्थानीय श्रद्धालु परिवार के निवेदन पर आचार्य श्री ने उनके निवास पर पगलिया कर मंगल आशीष दिया। मार्ग में एक स्थान पर कुछ ग्रामीण जन उपस्थित थे जब गुरुवर का उनके समक्ष से पधारना हुआ तो वे ऐसे महापुरुष के सामने सहज ही नतमस्तक हो गए। आचार्य श्री ने सभी को पावन आशीर्वाद दिया। चित्तौड़ जिला के पुलिस कर्मियों ने भी आचार्य श्री को वंदन कर आज सेवा से विदा ली। राज्य सरकार से राजकीय अतिथि होने से जिला पुलिस अधीक्षक विकास शर्मा ने स्वयं पहुंच सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
भीलवाड़ा जिला प्रवेश पर भीलवाड़ा के सांसद श्री सुभाष बहेङिया, पूर्व शिक्षा मंत्री रतनलाल जाट, एसडीएम मुकेश मीणा, एडिशनल एसपी गजेंद्र सिंह जोधा, नगर परिषद् सभापति राकेश पाठक, एसडीएम ओम प्रभा, तहसीलदार ललित कुमार पुरोहित सहित विभिन्न जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों ने अगवानी की।
मंगल प्रवचन में आचार्य श्री ने कहा- जीवन में सच्चे गुरुओं, साधु-संतों का सानिध्य मिलना बड़े सौभाग्य की बात होती है। जैन धर्म में तीर्थंकर भगवान को धर्म का प्रवर्तक कहा गया है। वे धर्म के अधिकृत प्रवक्ता होते हैं। वर्तमान में यहां कोई तीर्थंकर भगवान तो उपस्थित नहीं है। आचार्य तीर्थंकरों के प्रतिनिधि होते हैं। आचार्यों की दर्शन-सेवा से कर्मों का निर्जरण होता है। पूर्व में कोई अच्छे कर्म किए हुए होते हैं, तब वर्तमान में गुरु के दर्शन का योग बनता है और फिर वर्तमान में किए गए दर्शन से पुण्य की प्राप्ति होती है जो भविष्य को अच्छा बनाती है।

आचार्य प्रवर ने आगे कहा कि- संत दर्शन के कई लाभ होते हैं। संतों के पास धर्म श्रवण करने से जीवन का पथदर्शन होता है। कोई ग्राहक बुद्धि से प्रवचन सुने तो जीवन में कितना अच्छा बदलाव भी हो सकता है। संगति का व्यक्ति पर बहुत फर्क पड़ता है। एक व्यक्ति बुरे लोगों की संगति करता है तो उसमें न जाने गाली देना, झूठ बोलना, झगड़ा, नशा जैसी कितनी बुरी आदतें आ सकती है। वही अच्छी संगति करने से जीवन में सद्गुणों का विकास हो सकता है। यह ध्यान दें कि हमारी संगत कैसी है। संगती अच्छी तो जीवन अच्छा। बड़ों से जितना ज्ञान, संस्कार ग्रहण कर सके व्यक्ति को करना चाहिए। सद्गुणों से जीवन की शोभा बढ़ सकती है।

इस अवसर पर दीक्षा के 25 वर्ष पूर्ण होने पर साध्वी वंदनाश्री एवं साध्वी सुनंदाप्रभा ने पूज्य चरणों में भावाभिव्यक्ति दी। आशीर्वचन फरमाते हुए गुरुदेव ने कहा- यह संयम रत्न बहुत अनमोल होता है। इसके समक्ष तो पूरी दुनिया की संपदा भी बहुत छोटी है। इसकी सुरक्षा का हम ध्यान दें। लक्ष्य रहे की चारित्र में निर्मलता बनी रहे। प्रतिभा का उपयोग संघ की सेवा में लगाते रहे, मंगलकामना। कार्यक्रम में साध्वी प्रमुखाश्री जी का भी सारगर्भित उद्बोधन हुआ।इस अवसर पर पुज्य प्रवर की अगवानी में चातुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति अध्यक्ष प्रकाश सुतरिया सहित भीलवाड़ा का श्रावक समाज भी
उपस्थित था। स्वागत के क्रम में हमीरगढ़ की सरपंच रेखा परिहार ने भी अपने विचार रखे।

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