ओला इलेक्ट्रिक को उपभोक्ता आयोग का आदेश: नई बाइक दें या 1.20 लाख रुपए से अधिक राशि ब्याज सहित लौटाएं

ओला इलेक्ट्रिक को उपभोक्ता आयोग का आदेश: नई बाइक दें या 1.20 लाख रुपए से अधिक राशि ब्याज सहित लौटाएं

डैमेज बाइक की डिलीवरी नहीं लेने के बावजूद शुरू हो गई थी फाइनेंस की किश्तें, उपभोक्ता को 25 हजार रुपए आर्थिक संताप और 5 हजार रुपए परिवाद व्यय भी मिलेगा

चित्तौड़गढ़, स्मार्ट हलचल। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, चित्तौड़गढ़ ने उपभोक्ता के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए ओला इलेक्ट्रिक टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड चित्तौड़गढ़ एवं मुख्य शाखा बेंगलूरू को एक माह के भीतर नई बाइक उपलब्ध कराने अथवा फाइनेंस की जमा किश्तों सहित अग्रिम भुगतान की कुल राशि 1,20,851 रुपए 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है। आयोग ने इसके साथ परिवादी को आर्थिक संताप के लिए 25 हजार रुपए तथा परिवाद व्यय के 5 हजार रुपए अलग से अदा करने के निर्देश दिए हैं।

प्रकरण के अनुसार सतखंडा निवासी युवराज सिंह पुत्र नारायण सिंह चुण्डावत ने अधिवक्ता रतन कुमावत एवं खुमराज कुमावत के माध्यम से जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद पेश किया था। परिवादी के अनुसार मोटर साइकिल की आवश्यकता होने पर ओला के प्रचार से प्रभावित होकर मार्च 2025 में सिल्वर कलर की ओला रोडस्टर एक्स प्लस बाइक बुक कराई थी। बाइक की कीमत फाइनेंस सहित करीब 1.48 लाख रुपए तय हुई थी। परिवादी ने 49,715 रुपए डाउन पेमेंट अदा किया तथा ईकोफाई फाइनेंस के माध्यम से 86,789 रुपए का फाइनेंस कराया था, जिसकी 5,472 रुपए प्रतिमाह की किश्त निर्धारित थी।

परिवादी का आरोप था कि तय समय पर बाइक की डिलीवरी नहीं दी गई। काफी समय बाद शोरूम में जो बाइक उपलब्ध कराई गई, वह पूरी तरह क्षतिग्रस्त थी तथा उस पर स्क्रेच थे और बाइक चालू हालत में भी नहीं थी। परिवादी ने क्षतिग्रस्त बाइक लेने से इनकार करते हुए दूसरी बाइक उपलब्ध कराने की मांग की, लेकिन उसके अनुसार विपक्षीगण ने दूसरी बाइक उपलब्ध कराने के बजाय उसी बाइक को लेने का दबाव बनाया।

आयोग का आदेश
एक माह में नई बाइक उपलब्ध कराएं अथवा 1,20,851 रुपए 6 प्रतिशत ब्याज सहित लौटाएं। इसके अलावा 25 हजार रुपए आर्थिक संताप और 5 हजार रुपए परिवाद व्यय भी अदा करने होंगे।

परिवादी ने बाइक नहीं ली, इसके बावजूद विपक्षीगण द्वारा वाहन का सेंट्रलाइज्ड रजिस्ट्रेशन करा दिया गया। इसके बाद परिवादी के खाते से फाइनेंस की मासिक किश्तें कटने लगीं, जबकि बाइक उसके कब्जे में कभी आई ही नहीं। परिवादी की ओर से विपक्षीगण को नोटिस भी दिया गया, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर आयोग में परिवाद दायर किया गया।

मामले की सुनवाई के बाद आयोग के अध्यक्ष जगमोहन अग्रवाल एवं सदस्य हर्ष अरोड़ा ने परिवादी के अधिवक्ताओं के तर्कों से सहमत होते हुए परिवाद स्वीकार किया। आयोग ने विपक्षीगण की सेवा में कमी एवं लापरवाही मानते हुए निर्धारित अवधि में नई बाइक देने अथवा आदेश में निर्धारित राशि ब्याज एवं अन्य क्षतिपूर्ति के साथ अदा करने का आदेश दिया।