दहेज प्रताड़ना मामले में अदालत जाने पर सामाजिक बहिष्कार का आरोप, पीड़ितों ने प्रशासन से लगाई न्याय की गुहार

आसीन्द। स्मार्ट हलचल।जिले में दहेज प्रताड़ना के मामले में न्यायालय की शरण लेने पर सामाजिक बहिष्कार किए जाने का मामला सामने आया है। पीड़ितों का आरोप है कि विवाह के बाद उनकी बेटी को दहेज की मांग को लेकर घरेलू हिंसा एवं प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। इस मामले में जाति पंचायत के बजाय वैधानिक न्यायालय में न्याय की गुहार लगाने से नाराज होकर समाज के कुछ पदाधिकारियों ने 7 सितंबर 2025 को उनका सामाजिक बहिष्कार कर दिया।

पीड़ितों का कहना है कि बिना किसी निष्पक्ष सुनवाई अथवा विधिसम्मत कार्यवाही के उन्हें समाज से बाहर घोषित कर दिया गया। इसके बाद उनके हुक्का-पानी, शादी-विवाह के निमंत्रण, चोखला के सामाजिक कार्यक्रमों में आमंत्रण तथा अन्य सामाजिक संबंधों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया। इतना ही नहीं, यह भी कथित रूप से चेतावनी दी गई कि जो भी व्यक्ति बहिष्कृत परिवारों से सामाजिक संबंध रखेगा, उसे भी समाज से बाहर कर दिया जाएगा।

इस मामले में पीड़ित पक्ष में सोहन लाल प्रजापत (जीवार), गोपी लाल कुम्हार (जैतगढ़), पारसमल प्रजापत (हाथीभाटा) तथा सोहन लाल कुम्हार (अजीतगढ़) शामिल हैं।

पीड़ितों ने आरोप लगाया है कि श्री श्रीयादें प्रजापति विकास समिति के कुछ कार्यकारिणी सदस्यों की भूमिका इस कथित सामाजिक बहिष्कार में रही। शिकायत में जिन लोगों के नाम शामिल किए गए हैं, उनमें लादू लाल एड़ी (बदनोर), राजू (गोवलिया), छोगा लाल (अक्षयगढ़), मिश्री लाल (खड़ियाखेड़ा) तथा गोपाल लाल (सापोला) शामिल हैं।

पीड़ितों ने जिला प्रशासन एवं पुलिस से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई करने, सामाजिक बहिष्कार समाप्त कराने तथा उन्हें सुरक्षा और न्याय दिलाने की मांग की है।