रणवीर सिंह चौहान
स्मार्ट हलचल /नेत्रदान के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ती जा रही है एवं यह अब परंपरा का हिस्सा बनने लगा है, इसी क्रम में भवानीमंडी के समाजसेवी देवेंद्र पाल छाबड़ा ने अपने पिता के बाद अपने स्वसुर का भी नेत्रदान करवा कर एक प्रेरणास्पद कार्य किया है।
शाइन इंडिया फाउंडेशन एवं भारत विकास परिषद के नेत्रदान संयोजक कमलेश गुप्ता दलाल ने बताया कि ज्योति मित्र देवेन्द्रपाल के स्वसुर अपनी पुत्री मनमीत कौर के यहां पर भवानीमंडी आए हुए थे, स्वास्थ्य खराब होने पर उन्हें निजी चिकित्सालय में भर्ती किया गया एवं मंगलवार रात्रि को चिकित्सालय में ही उनका निधन हो गया। चिकित्सालय में उपस्थित मनमीत कौर ने अपने पति देवेन्द्रपाल सिंह से पिता के नेत्रदान के लिए बातचीत की, देवेन्द्रपाल पहले से ही भवानीमंडी के नेत्रदान कार्यक्रम एवं गोशाला के माध्यम से समाज सेवा से जुड़े हुए हैं ऐसे में परिवार से आवश्यक सहमति लेकर उन्होंने शाइन इंडिया फाउंडेशन को सूचना दी तथा सूचना प्राप्त होने पर भवानीमंडी से 110 किलोमीटर दूर कोटा से शाइन इंडिया फाउंडेशन की टीम रात्रि को 11 बजे नेत्र संकलन वाहिनी ज्योति-रथ को लेकर भवानीमंडी पहुंची तथा घर पर नेत्रदान प्रक्रिया संपादित करके हरबंस सिंह अरोड़ा का कॉर्निया प्राप्त किया, नेत्रदान प्रक्रिया में मनमीत कौर, रविंद्र पाल, हरदीप सिंह, अजयपाल सिंह, डाॅ राजदीप सिंह छाबड़ा, मनिंदर सिंह भाटिया, सोनू होरा आदि ने सहयोग किया। नेत्रदान प्रक्रिया के बाद परिवार के द्वारा शाइन इंडिया फाउंडेशन को नेत्रदान अभियान के लिए ग्यारह हजार रुपए का सहयोग भी दिया गया।
हरबंस सिंह अरोड़ा का कॉर्निया अच्छा पाया गया है जिसे आई बैंक जयपुर को भिजवा दिया गया है, जहां यह दो असहाय नेत्रहीन लोगों को नई नेत्र ज्योति प्रदान कर सकेगा।
नेत्रदान प्रभारी कमलेश गुप्ता दलाल के अनुसार यह भवानीमंडी से 155 वां नेत्रदान है। देवेंद्रपाल सिंह छाबड़ा के द्वारा अपने पिता हरबंस सिंह छाबड़ा के निधन के पश्चात उनका नेत्रदान करवाया जा चुका है एवं सुरेंद्र कौर, चरणजीत कौर, नवदीप सिंह, चचेरे भाई देवेंद्रपाल इस तरह से एक ही संबंधित परिवार के छह सदस्यों का नेत्रदान हुआ है एवं यह पूरे कोटा संभाग में पहली बार किसी परिवार से हुआ है।
