(बजरंग आचार्य)
सादुलपुर,स्मार्ट हलचल|समाज में मृत्युभोज जैसी फिजूलखर्ची वाली प्रथाओं को दरकिनार कर विकास की नई इबारत कैसे लिखी जाती है, इसका जीवंत उदाहरण शुक्रवार को ददरेवा गांव में देखने को मिला। गांव की बेटी रुकमणी खीचड़ ने अपने स्वर्गीय पिता जीवणराम खीचड़ की पुण्य स्मृति में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में एक विशाल भोजनशाला का निर्माण करवाकर उसे छात्र हित में समर्पित किया। शुक्रवार को आयोजित एक भव्य समारोह के दौरान सैंकड़ों ग्रामीणों की उपस्थिति में इस नव-निर्मित भवन का विधिवत उद्घाटन किया गया।
समारोह के मुख्य अतिथि बालयोगी महंत श्री कृष्ण नाथ महाराज, सरपंच जाहिद कुरैशी एवं प्रधानाचार्य राजकुमार ने संयुक्त रूप से फीता काटकर भोजनशाला का लोकार्पण किया। इस दौरान महंत कृष्ण नाथ ने खीचड़ परिवार को आशीर्वाद देते हुए कहा कि शिक्षा के मंदिर में किया गया दान सर्वोत्तम है। सरपंच जाहिद कुरैशी ने इस पहल को ऐतिहासिक बताते हुए ग्रामीणों से आह्वान किया कि वे मृत्युभोज जैसी सामाजिक कुरीतियों का त्याग करें और अपने पूर्वजों की याद में विद्यालय व जनहित के कार्यों में सहयोग कर समाज को नई दिशा प्रदान करें।
कार्यक्रम में मौजूद सेवानिवृत्त शिशुपाल सिंह ने छात्र-छात्राओं को आधुनिकता के साथ-साथ अपनी संस्कृति और संस्कारों को सहेजने की प्रेरणा दी। विद्यालय के प्राचार्य राजकुमार ने भामाशाह रुकमणी खीचड़ और इस पुनीत कार्य के प्रेरणास्रोत वरिष्ठ अध्यापक भाला राम खीचड़ का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि विद्यालय में जनसहयोग से पिछले तीन माह के अल्प समय में कायाकल्प हुआ है, जिसमें 35 फीट गहरे कुंड का जीर्णोद्धार, नए स्टोर रूम का निर्माण, शौचालय और चारदीवारी जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं।
इस गौरवमयी क्षण के साक्षी बने सतवीर धेतरवाल, एडवोकेट हेमराज खीचड़, फूलाराम, रोहताश रुलानिया, सेउवा सरपंच सीटू शेखू, पूर्व सरपंच विशु रजलीवाल और सतवीर गोरा सहित बड़ी संख्या में प्रबुद्ध नागरिक। उपस्थित ग्रामीणों ने खीचड़ परिवार के इस जज्बे को साधुवाद देते हुए विद्यालय विकास में निरंतर सहयोग का संकल्प लिया।


