बेटियों के भविष्य से फिर खिलवाड़ .. संस्था एक ही,शिक्षा के नाम पर पनपते इन “ठग नेटवर्क” पर आखिर लगाम कौन लगाएगा

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विशेष रिपोर्ट – आकाश शर्मा
चित्तौड़गढ़ ।स्मार्ट हलचल|कलेक्ट्री परिसर में सिसकती बेटियां और न्याय की गुहार एक बार फिर चित्तौड़गढ़ की धरती पर बेटियों के अरमानों का गला घोंटने की एक दर्दनाक दास्तान सामने आई है। न्याय की आस में कभी इस कार्यालय तो कभी उस चौखट के चक्कर काटती इन बेटियों के चेहरे पर पसरा भारी तनाव और आंखों से थमने का नाम न लेते आंसू इस बात की गवाही दे रहे हैं कि हमारे सिस्टम में कहीं बहुत कुछ गलत चल रहा है। आज कलेक्ट्री परिसर में भारी संख्या में मौजूद इन बेटियों की हालत देख पत्थर दिल इंसान का भी कलेजा पसीज जाए।मामला बेहद गंभीर और सनसनीखेज है। चित्तौड़गढ़, उदयपुर, भीलवाड़ा और खेरवाड़ा समेत राजस्थान के विभिन्न जिलों की करीब 100 बेटियों का नर्सिंग कोर्स और उनका उज्ज्वल भविष्य आज एक बार फिर गहरे संकट में आ गया है।
क्या है पूरा मामला ,छत्तीसगढ़ के कॉलेजों से जुड़ा फर्जीवाड़ा
नवंबर महीने में सेंट्रल इंडिया कॉलेज ऑफ़ नर्सिंग (देवदा, छत्तीसगढ़) और ग्रेसियस कॉलेज ऑफ़ नर्सिंग (रायपुर, छत्तीसगढ़) की GNM नर्सिंग परीक्षाएं होनी हैं। लेकिन इन बेटियों के भविष्य के साथ ऐसा क्रूर खेल खेला गया है कि संस्थान द्वारा अभी तक इनके एडमिशन फॉर्म तक नहीं भरे गए हैं, ऐसे में प्रवेश पत्र (Admit Card) कहां से आएगा ? इस पूरे काले खेल के केंद्र में है भीलवाड़ा की ‘श्री बालाजी कोचिंग एंड कंसल्टेंसी’, जिसने एक बार फिर अपनी कथित फर्जी करतूतों से मासूम छात्राओं की गाढ़ी कमाई और उनके सपनों को दांव पर लगा दिया है । इस कंसल्टेंसी का एक कार्यालय चित्तौड़गढ़ के प्रतापनगर में संचालित होता है। तंग आकर आज आक्रोशित छात्राओं ने प्रताप नगर स्थित इस कार्यालय पर ताला जड़ दिया और पुलिस अधीक्षक (SP) से मिलकर अपनी आपबीती सुनाई । गौरतलब है कि कल ही छात्राओं ने शहर के सदर थाने में लिखित शिकायत दी थी, जिस पर पुलिस अधीक्षक ने त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
ठगी का पुराना इतिहास और 25 लाख से अधिक का फर्जीवाड़ा
यह पहली बार नहीं है जब इन ठगों ने बेटियों के भविष्य को निशाना बनाया हो। कुछ ही दिनों पूर्व इसी कंसल्टेंसी ने पंजाब के एक नर्सिंग कॉलेज में दाखिला दिलाने के नाम पर प्रत्येक छात्रा से 45,000 से 60,000 रुपये तक वसूले थे । यह आंकड़ा 25 लाख रुपये से अधिक का बताया जा रहा है। जब परीक्षा का वक्त आया, तो कॉलेज का कहना है कि उनके पास फीस पहुंची ही नहीं है ! आखिर छात्राओं द्वारा दिए गए लाखों रुपए गए कहाँ? क्या यह किसी बड़े संगठित रैकेट का हिस्सा है ? सूत्रों के अनुसार, इस पूरे खेल में स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कुछ भ्रष्ट सरकारी कर्मचारियों की सीधी संलिप्तता की बात सामने आ रही है, जिसकी परतें अभी खुलनी बाकी हैं ।
इस संगठित ‘शिक्षा माफिया’ के चेहरे
विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे ठग नेटवर्क के तार दूर-दूर तक फैले हैं और इसके मास्टरमाइंड सरकारी व्यवस्था की आड़ में फल-फूल रहे हैं । प्रिंस जैन (भीलवाड़ा): ‘श्री बालाजी कोचिंग एंड कंसल्टेंसी’ का मुख्य संचालक । राकेश गुप्ता और जो अपनी पत्नि के नाम से अपना कारोबार चला रहें है सूत्रों के अनुसार, ये ESI हॉस्पिटल भीलवाड़ा में लैब टेक्निशियन के पद पर कार्यरत हैं। प्रकाश रजक और उनकी पत्नी यह जोड़ा,प्रकाश रजक जिला सावलिया जी चिकित्सालय (चित्तौड़गढ़) में मेल नर्स (सर्जिकल) के रूप में अपनी सरकारी सेवाएं दे रहा है तो पत्नि मैना रजक पति प्रकाश रजक भोई खेड़ा PHC पर अपनी सेवाए दे रही है । नरेन्द्र शर्मा प्रतापनगर स्थित संस्थान के ऑफिस पर कार्यरत रहे। पंजाब वाले मामले के सामने आने के बाद इन्होंने नौकरी छोड़ दी और अब इन पीड़ित छात्राओं की इस लड़ाई में उनका साथ दे रहे हैं ।
आखिर कब तक मासूम बेटियां इन ठगों के तंत्र का शिकार बनती रहेंगी ? क्या प्रशासन इन शिक्षा माफियाओं पर नकेल कसते हुए बेटियों के भविष्य को सुरक्षित कर पाएगा ? यह आज हर जागरूक नागरिक का सबसे बड़ा सवाल है।