कोटा, बीकानेर और जोधपुर के बाद अब भीलवाड़ा में प्रसूताओं की मौत का मामला गरमा गया है. भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में पिछले 6 दिन में 5 प्रसूताओं की मौत हो चुकी है. ताजा मामला, शुक्रवार (10 जुलाई) को पोटला निवासी संगीता जीनगर (32) की मौत का है, जिसे आईसीयू में भर्ती करवाया था. वहीं, सिजेरियन डिलीवरी के बाद प्रसूताओं की मौत के बाद ओटी (ऑपरेशन थिएटर) बंद कर दिया गया है. इस प्रकरण पर हॉस्पिटल प्रशासन का कहना है कि किसी की मौत की वजह हीमोग्लोबिन में कमी तो किसी की बीमारी की वजह से मौत हुई. हॉस्पिटल प्रशासन ने कमेटी गठित कर जांच शुरू कर दी है.
महात्मा गांधी अस्पताल के पीएमओ डॉ. अरुण गौड का कहना है कि जिला मुख्यालय पर ग्रामीण क्षेत्र समेत दूसरे जिलों से प्रसव के लिए प्रसूताएं आती हैं. पिछले 3 दिनों से जांच रिपोर्ट आने के बाद ओटी बंद कर दी है. अस्पताल में प्रसूताओं की मौत की वजह पल्मोनरी, एम्बोलिज्म, गंभीर एनीमिया और हीमोग्लोबिन कम होना है. डॉ. गौड़ ने बताया कि प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव के चलते भी मौत हुई.
गहलोत ने पूछा- संक्रमण के बावजूद ओटी में ऑपरेशन क्यों?
इस प्रकरण में सियासी प्रतिक्रिया भी देखने को मिल रही है. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी शोकाकुल परिजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं जताई. उन्होंने मांग की है कि राजस्थान के अलग-अलग अस्पतालों में स्थिति का सही मूल्यांकन करने के लिए केंद्र को एक्सपर्ट की टीम भेजकर जांच करवानी चाहिए.
गहलोत ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल करते हुए कहा, “ऑपरेशन थिएटर (OT) में संक्रमण की रिपोर्ट पॉजिटिव होने के बावजूद लगातार ऑपरेशन करना लापरवाही है. कोटा और बीकानेर, जोधपुर के बाद अब भीलवाड़ा की यह स्थिति विचलित करने वाली है. क्या राजस्थान को भाजपा सरकार ने भगवान भरोसे छोड़ दिया है?”
