विधायक आक्या ने किराए के भवनों में संचालित केंद्रीय सहकारी बैंकों को भवन निर्माण हेतु निशुल्क भूमि आवंटन की मांग रखी

ओम जैन

शंभूपुरा।स्मार्ट हलचल|चित्तौड़गढ़ विधायक चंद्रभान सिंह आक्या ने सोमवार को विधानसभा में सरकार से किराए के भवनों में संचालित केंद्रीय सहकारी बैंकों को भवन निर्माण हेतु निशुल्क भूमि आवंटित किए जाने की मांग रखी।
विधायक आक्या ने सदन में विधानसभा अध्यक्ष के माध्यम से सरकार से पूछा कि प्रदेश में सहकारी बैंकों की कितनी शाखाएं किराए के भवनों में संचालित है। उक्त शाखाओं के कार्य क्षेत्र में आने वाले गांव की संख्या कितनी है। क्या सरकार ग्राम सेवा सहकारी समितियां की भांति केंद्रीय सहकारी बैंकों को भी निशुल्क भूमि आवंटन करने का विचार रखती है? क्या सरकार राष्ट्रीयकृत बैंकों की भांति जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों में वित्तीय बैंकिंग सेवा कियोस्क विकसित करने का विचार रखती है? क्या सरकार उक्त बैंकों के विस्तार व विकास हेतु विभाग स्तर पर कार्य योजना बनाने का विचार रखती है?
विधायक आक्या के प्रश्न का जवाब देते हुए सहकारिता राज्य मंत्री ने कहा कि प्रदेश में जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों की 304 शाखाएं किराए के भवनों में संचालित है। इन शाखाओं के कार्य क्षेत्र में आने वाले गांवों की संख्या 29639 है। उन्होंने कहा कि राज्य के जिला केंद्रीय सहकारी बैंक भारतीय रिजर्व बैंक के लाइसेंस धारक बैंक होने से वाणिज्यिक संस्थान है उनके कार्यों पर होने वाले खर्च बैंकों के लाभ व अन्य कोषो से किए जाते हैं। इन बैंकों को निशुल्क भूमि आवंटन नहीं किया जा सकता है। राज्य मंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा राष्ट्रीयकृत बैंकों की भांति जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों में वित्तीय बैंकिंग सेवा कियोस्क विकसित करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। इन बैंकों में सदस्यों को नकद जमा, नकद निकासी, मिनी स्टेटमेंट, बकाया राशि की पूछताछ की सुविधा प्रदान की जा रही है। सरकार के स्तर पर उक्त बैंकों के विस्तार व विकास हेतु सर्वे करवाकर क्षमता के आधार पर नवीन शाखाएं खोलने की कार्यवाही की जा रही है।
सहकारिता राज्य मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विधायक आक्या ने सदन में कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक से लाइसेंस धारक होने की वजह से किराए के भवनों में संचालित केंद्रीय सहकारी बैंकों को निशुल्क भूमि आवंटन नहीं की जा सकती है। क्या राज्य सरकार के पास ऐसा कोई नियम है जो इस निशुल्क आवंटन को प्रतिबंधित करती है। उन्होंने कहा कि सरकार जब पैक्स, लैंप्स मार्केट भंडार सहकारी समितियां, सामाजिक संस्थाओं को निशुल्क रियायती दर पर या डीएलसी रेट पर भूमि आवंटित करती है तो केंद्रीय सहकारी बैंकों को भी सरकार के स्तर पर भूमि आवंटित की जानी चाहिए।
इस पर सहकारिता राज्य मंत्री ने कहा कि ग्राम सेवा सहकारी समिति व केंद्रीय सहकारी बैंक की प्रकृति व भूमिका अलग-अलग होती है। ग्राम सेवा सहकारिता समिति ग्राम स्तर की सहकारी संस्था है यह सीधे-सीधे किसानों को खाद बीज भंडारण की सेवाएं देती है। ग्राम सेवा सहकारिता समिति छोटी संस्था होती है जिसके सीमित संसाधन होते हैं इसके आधारभूत ढांचे को विकसित करने के लिए सरकार द्वारा सहायता व निशुल्क भूमि आवंटित की जाती है। जबकि केंद्रीय सहकारी बैंक जिला स्तर का बैंक है जिनके स्वयं के वित्तीय संसाधन होते हैं। उन्होंने विधायक आक्या की मांग पर सहमति जताते हुए कहा कि केंद्रीय सहकारी बैंकों को भूमि अनुमत करने का प्रस्ताव आता है तो सरकार निश्चित ही उसे पर विचार करेगी।