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नारायणपुर में सिविल न्यायालय खोलने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू, न्यायिक कार्यों का बहिष्कार

बिन्टू कुमार

नारायणपुर| स्मार्ट हलचल|कस्बे में न्यायिक सुविधाओं के विस्तार और स्थानीय स्तर पर राहत की मांग को लेकर बुधवार को अभिभाषक संघ, डीडराइटर्स और स्टाम्प वेंडरों ने तहसील कार्यालय के सामने धरना शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने नारायणपुर उपखंड स्तर पर सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय खोलने की मांग उठाते हुए सरकार से शीघ्र कार्रवाई करने की अपील की। एडवोकेट रविंद्र शर्मा ने कहा कि नारायणपुर थाना क्षेत्र के न्यायिक क्षेत्राधिकार को अलवर जिले के थानागाजी से हटाकर कोटपुतली-बहरोड़ जिले में स्थानांतरित कर दिया गया है। इस बदलाव के कारण स्थानीय पक्षकारों और आमजन को कानूनी कार्यों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ने के साथ समय की भी काफी बर्बादी हो रही है। उन्होंने कहा कि सुलभ और त्वरित न्याय सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए, लेकिन स्थानीय स्तर पर न्यायालय नहीं होने से लोगों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। अधिवक्ताओं ने विरोध स्वरूप अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार का ऐलान किया है। इसके चलते तहसील कार्यालय में होने वाले रजिस्ट्री, शपथ पत्र और अन्य दस्तावेज संबंधी कार्य पूरी तरह ठप हो गए हैं, जिससे दूर-दराज से आने वाले ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांग पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती, तब तक धरना और कार्य बहिष्कार जारी रहेगा।
धरने के दौरान एडवोकेट विजय कुमार महर्षि, रामपाल सैनी, दिनेश शर्मा, रामकृष्ण चौपड़ा, लक्ष्मण प्रसाद दर्जी, कैलाश चंद, तरुण तिवाड़ी, रणजीत यादव, अर्जुन लाल, राजेन्द्र प्रसाद, श्योराम, सचिन गुर्जर, नरेंद्र शर्मा और दाताराम सैनी सहित बड़ी संख्या में संघ के सदस्य और स्थानीय लोग मौजूद रहे।

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