(शीतल निर्भीक ब्यूरो)
वाराणसी। स्मार्ट हलचल|योगी सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सख्त कानून, मिशन शक्ति, एंटी रोमियो स्क्वॉड,महिला हेल्पलाइन और कमिश्नरेट पुलिस जैसी कई व्यवस्थाएं लागू की हैं, लेकिन इन तमाम प्रयासों के बावजूद जमीनी हकीकत चिंता पैदा करने वाली है। काशी में सामने आए आंकड़े बताते हैं कि महिला सुरक्षा अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।बीते एक साल में जिले के अलग -अलग थानों में महिला अपराध से जुड़े 1686 मामले दर्ज किए गए, यानी औसतन रोज़ पांच महिलाएं किसी न किसी रूप में हिंसा की शिकार हुईं। घरेलू हिंसा, मारपीट, उत्पीड़न और छेड़खानी जैसी घटनाओं ने यह साबित कर दिया कि महिलाओं के लिए घर और समाज दोनों ही पूरी तरह सुरक्षित नहीं रह गए हैं।
दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराधों ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। साल भर में 27 दुष्कर्म की घटनाएं दर्ज हुईं, यानी हर 15 दिन में एक महिला की अस्मत लुटी। कमिश्नरेट व्यवस्था लागू होने के बाद अब तक 284 महिलाएं दुष्कर्म की शिकार हो चुकी हैं।
पुलिस का दावा है कि 2025 में मामलों में कुछ कमी आई है, लेकिन हर नई घटना इन दावों को कमजोर करती नजर आती है। छेड़खानी और पॉक्सो एक्ट से जुड़े अपराध भी तेजी से बढ़े हैं। एक साल में ऐसे 910 मामले दर्ज किए गए, जिनमें मासूम बच्चियों के साथ हुए अपराध भी शामिल हैं।
पुलिस ने दुष्कर्म के मामलों में 509 आरोपियों को गिरफ्तार किया, वहीं 448 पॉक्सो मामलों में अभियुक्तों को जेल भेजा गया, लेकिन इसके बावजूद अपराधियों के हौसले पूरी तरह टूटते नहीं दिखे। महिलाओं की पीड़ा घर की दीवारों के भीतर भी छिपी रही। घरेलू प्रताड़ना के 617 मामले मिशन शक्ति केंद्रों तक पहुंचे, जहां कुछ पीड़िताओं को काउंसिलिंग से राहत मिली, कुछ को कानूनी सहायता दी गई और 92 महिलाओं को चिकित्सकीय इलाज की जरूरत पड़ी। विवेचना के दौरान 1054 अभियुक्तों पर कार्रवाई हुई, 381 मामलों में फाइनल रिपोर्ट दाखिल की गई और 106 आरोपियों पर गुंडा एक्ट के तहत सख्त कदम उठाए गए। न्याय की धीमी रफ्तार भी पीड़िताओं की पीड़ा बढ़ा रही है।
वर्ष 2025 में महिला अपराध से जुड़े सिर्फ 67 मामलों में ही सजा हो सकी, जिनमें दुष्कर्म के केवल दो, पॉक्सो के 52 और दहेज हत्या के 11 मामले शामिल हैं,जबकि बाकी मामले अब भी अदालतों में लंबित हैं। अपहरण से जुड़े आंकड़े भी हालात की गंभीरता को उजागर करते हैं। दो साल में 565 महिलाएं और बालिकाएं बरामद की गईं, जिनमें अधिकतर मामले सोशल मीडिया,बहला-फुसला कर ले जाने या रिश्तों की आड़ से जुड़े पाए गए।
योगी सरकार व पुलिस महिला सुरक्षा को लेकर लगातार प्रयासरत होने का दावा कर रही है, लेकिन बढ़ती घटनाएं यह साफ कर रही हैं कि यह स्थिति केवल कानून नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है।


