भीलवाड़ा/कोटड़ी (मूलचन्द पेसवानी) । जागीर कालीन विरासत, पर्यावरण का प्रहरी और ग्रामीण जलस्तर का आधार कोटड़ी तहसील का फलासेड़ ग्राम का धर्माउ तालाब आज खुलेआम लूट का अड्डा बन चुका है। हाईकोर्ट के सख्त आदेश, राजस्व मंडल की फटकार, कलेक्टर-एसडीओ के निर्देश सब धरे के धरे। आरोप है कि पटवारी-गिरदावर और तथाकथित खाप पंचायत की मिलीभगत से तालाब से दिन-रात पानी चुराया जा रहा है, मिट्टी खोदी जा रही है और मछली ठेके के नाम पर लाखों का खेल खेला जा रहा है।
फलासेड़ का यह धर्माउ तालाब श्रीबिहारीजी महाराज स्थानदेह जीवनसिंह ट्रस्ट मन्दिरान रासेड़ के अधीन है। बरसों से ट्रस्ट और ग्रामीणों की सहमति से यहां जल निकासी, मछली पालन, शिकार और मिट्टी दोहन पर पूर्ण प्रतिबंध रहा है। हर साल इसकी सूचना प्रशासन को दी जाती रही। बावजूद इसके, पिछले कुछ वर्षों से “खाप पंचायत” के नाम पर कुछ प्रभावशाली लोगों ने राजस्व अमले की शह पर तालाब को निजी खदान और ट्यूबवेल में बदल दिया।
करीब एक करोड़ का खेल!
ट्रस्ट व्यवस्थापक जमनालाल शर्मा का आरोप है कि अवैध जल चोरी, मिट्टी दोहन और मछली ठेका देकर करीब एक करोड़ रुपये का बेजा लाभ उठाया गया। तालाब में बिजली कनेक्शन तक करा दिए गए, पंप-मोटर लगातार चल रहे हैं। करीब 4 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाकर दिन-रात पानी चुराया जा रहा है और प्रति बीघा लगभग 1500 रुपये की अवैध वसूली की जा रही है।
फर्जी ठेका, राजकोष को चूना
ट्रस्ट व्यवस्थापक जमनालाल शर्मा ने बताया कि साल 2024-25 में हल्का पटवारी अभिषेक खांडाल, गिरदावर गोपाल शर्मा और खाप पंचायत गुर्जरान पर फर्जी दस्तावेजों से मछली पालन का सवा छह लाख का ठेका देने का आरोप है। यह ठेका ऐजाज मोहम्मद को देकर मछलियों की चोरी कर रकम राजकोष में जमा कराने के बजाय कथित तौर पर जेबों में डाल ली गई।
सबूत मिटाने की साजिश
ट्रस्ट व्यवस्थापक जमनालाल शर्मा के अनुसार 4 जून 2025 को भगवानलाल गुर्जर से कथित भारी रिश्वत लेकर पाइपलाइन दबवाकर सबूत मिटाने का आरोप भी लगाया गया है। इसी दौरान करीब 300 ट्रैक्टर मिट्टी की अवैध निकासी, पेड़ों की कटाई और क्षेत्र को तहस-नहस कर दिया गया।
शिकायतें, जांचें नतीजा शून्य
ट्रस्ट व्यवस्थापक जमनालाल शर्मा ने बताया कि 23 और 25 जून 2025 को पारोली थाने में रिपोर्ट दी गई। एसडीओ कोटड़ी ने जांच के आदेश दिए, लेकिन तहसीलदार ने जांच उसी पटवारी को सौंप दी। नतीजा शून्य। आराजी भूमि की पत्थरगड़ी के आदेश के बाद भी गिरदावर पर 9 हजार की रिश्वत लेने का आरोप है।
हाईकोर्ट का आदेश भी हवा
ट्रस्ट व्यवस्थापक जमनालाल शर्मा ने बताया कि राजस्थान हाईकोर्ट ने 10 मई 2019 को खसरा संख्या 28, 36, 170, 175, 702/190, 144, 154 सहित पूरे कैचमेंट एरिया से अतिक्रमण तत्काल हटाने के आदेश दिए थे। छह साल बाद भी न पटवारी हिले, न गिरदावर, न तहसीलदार, न पुलिस। उलटे टालमटोल और मनमानी व्याख्याएं चलती रहीं। अवमानना को लेकर 3 अक्टूबर 2025 को विधिक नोटिस तक दिया जा चुका है। बावजूद प्रशासन कुछ नहीं कर पा रहा है।
जांच के बावजूद पदोन्नति!
ट्रस्ट व्यवस्थापक जमनालाल शर्मा के अनुसार राजस्व मंडल अजमेर ने नायब तहसीलदार श्रीलाल मीणा, पटवारी अभिषेक खांडाल और गिरदावर गोपाल शर्मा के खिलाफ जांच के आदेश दिए, लेकिन कोटड़ी तहसील में मिलीभगत के चलते यहीं पदोन्नति दे दी गई। यह सवाल खड़ा करता है कि कार्रवाई किसके खिलाफ और संरक्षण किसे?
एसडीओ मौके पर, फिर भी कार्रवाई गायब
ट्रस्ट व्यवस्थापक जमनालाल शर्मा ने कहा है कि कोटड़ी की मौजूदा एसडीओ ने स्वयं मौके पर पहुंचकर अवैध जल-मिट्टी दोहन रोकने और मछली ठेके की जांच के आदेश दिए। 5 दिसंबर 2025 को 7 दिन में संयुक्त जांच रिपोर्ट का निर्देश भी दिया। लेकिन रिपोर्ट आज तक नहीं। उलटे ट्रस्ट व्यवस्थापक को धमकाने के आरोप लग रहे हैं। 22 दिसंबर को बनी समिति में भी आरोपियों को ही शामिल कर लिया गया।
ग्रामीणों में आक्रोश
ट्रस्ट व्यवस्थापक जमनालाल शर्मा का आरोप है कि हाईकोर्ट, राजस्व मंडल, कलेक्टर और एसडीओ के स्पष्ट आदेशों के बावजूद धर्माउ तालाब से न जल दोहन रुका, न मिट्टी दोहन। खाप पंचायत, पटवारी, गिरदावर और नायब तहसीलदार मिलकर लाखों की अवैध वसूली कर रहे हैं। फलासेड़-रासेड़ के ग्रामीण दहशत में हैं, राजआदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
अब फिर हाईकोर्ट की शरण
ट्रस्ट व्यवस्थापक जमनालाल शर्मा ने चेताया कि यदि तत्काल कार्रवाई नहीं हुई तो वे दोबारा राजस्थान हाईकोर्ट जाएंगे। विधिक नोटिस पहले ही दिया जा चुका है। सवाल साफ है। क्या अदालतों के आदेश कागज बनकर रह जाएंगे? या धर्माउ तालाब पर चल रहा यह “सरकारी संरक्षण वाला लूट तंत्र” कभी टूटेगा?













