रमेश चंद्र डाड
बद्रीलाल तेली ने अफीम नीति का किया विरोध, कहा—किसान हितों को ध्यान में रखकर सरकार करे पुनर्विचार
चित्तौड़गढ़/भीलवाड़ा /आकोला : स्मार्ट हलचल|केंद्र सरकार की ओर से अफीम नीति वर्ष 2026-27 घोषित होने के बाद अफीम उत्पादक किसानों के बीच असंतोष की स्थिति बनी हुई है। नीति के प्रावधानों को लेकर किसानों में लाइसेंस और पट्टों को लेकर चिंता बढ़ गई है। वहीं, बड़ी संख्या में किसानों के बिना चीरा लगाए पोस्ता भूसा उत्पादन की सीपीएस (CPS) पद्धति में जाने की संभावना को किसान हित में उचित नहीं माना जा रहा है।
चित्तौड़ प्रांत राजस्थान प्रदेश के प्रांत अफीम आयाम प्रमुख एवं अध्यक्ष बद्रीलाल तेली ने अफीम नीति का विरोध करते हुए कहा कि वर्तमान प्रावधानों से अफीम किसानों के सामने कई तरह की चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को किसानों की समस्याओं और आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए नीति पर पुनर्विचार करना चाहिए, ताकि वर्षों से अफीम की खेती कर रहे किसानों को नुकसान का सामना नहीं करना पड़े।
न्यूनतम मार्फीन उपज का प्रावधान बना चर्चा का विषय
नीति के अनुसार, फसल वर्ष 2025-26 में प्रति हेक्टेयर कम से कम 4.4 किलोग्राम मार्फीन औसत उपज (MQY-M) प्राप्त करने वाले पात्र किसानों को चीरा लगाकर अफीम उत्पादन के लाइसेंस के लिए पात्रता दी गई है। इसके अतिरिक्त निर्धारित शर्तों को पूरा करने वाले फसल हांकने वाले किसानों, अपील में पात्र घोषित किसानों तथा पात्र मृतक किसानों के नामांकित व्यक्तियों या कानूनी वारिसों के लिए भी प्रावधान किए गए हैं।
नीति के तहत पात्र किसानों को एक प्लॉट में 0.10 हेक्टेयर यानी 10 आरी क्षेत्रफल का लाइसेंस देने का प्रावधान है। निर्धारित क्षेत्र पूरा करने के लिए दूसरे किसानों की जमीन पट्टे पर लेने की छूट भी दी गई है। वास्तविक खेती लाइसेंसशुदा क्षेत्र से पांच प्रतिशत तक अधिक पाए जाने पर उसे क्षम्य सीमा में रखने का प्रावधान बताया गया है।
अगले वर्ष के लिए बढ़ेगी उपज की अनिवार्यता
नीति में आगामी फसल वर्ष 2027-28 के लिए भी महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। इसके अनुसार, वर्ष 2026-27 में प्रति हेक्टेयर 5.9 किलोग्राम मार्फीन की न्यूनतम औसत उपज प्राप्त करना आगामी वर्ष की लाइसेंस पात्रता के लिए आवश्यक होगा।
वहीं, लगातार तीन वर्षों तक पूरी फसल हांकने वाले किसानों को वर्ष 2027-28 में लाइसेंस नहीं देने तथा वर्ष 2026-27 में पूरी फसल हांकने वाले किसानों को अगले वर्ष बिना चीरा लगाए पोस्ता भूसा (सीपीएस) पद्धति के लिए पात्र मानने जैसे प्रावधान भी शामिल हैं। पात्र होने के बावजूद लाइसेंस नहीं लेने या खेती नहीं करने वाले किसानों के लिए भी सीपीएस पद्धति से संबंधित प्रावधान किए गए हैं।
किसान हित में नीति पर पुनर्विचार की मांग
बद्रीलाल तेली ने कहा कि अफीम किसानों की आजीविका और भविष्य को ध्यान में रखते हुए नीति बनाई जानी चाहिए। किसानों को ऐसी परिस्थितियों में नहीं धकेला जाना चाहिए, जहां उन्हें अपनी परंपरागत खेती से हटकर दूसरी पद्धति अपनाने के लिए मजबूर होना पड़े। उन्होंने सरकार से मांग की कि किसानों की समस्याओं का समाधान करते हुए लाइसेंस संबंधी नियमों में राहत दी जाए और अफीम उत्पादकों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
नीति के अनुसार पात्र किसानों की सूची केंद्रीय स्वापक ब्यूरो (CBN) की आधिकारिक वेबसाइट और ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाएगी। आवेदन की समय-सीमा, लाइसेंसिंग की विस्तृत तिथियां तथा गांववार कार्यक्रम अलग से जारी किए जाने हैं।