न्यू लुक स्कूल विवाद में जिला न्यायालय का बड़ा फैसला, प्रकरण में फिर होगी सुनवाई

(पंकज पोरवाल)

प्रतिष्ठित न्यू लुक स्कूल मालिकाना विवाद ने फिर पकड़ी रफ्तार, महेन्द्र पारख व अनिमेश पारख के विरुद्ध मामले में फिर शुरू होगी न्यायिक प्रक्रिया

भीलवाड़ा।स्मार्ट हलहल|शहर के कोटा रोड स्थित प्रतिष्ठित न्यू लुक सोसायटी स्कूल के मालिकाना हक को लेकर वर्षों से चल रहे विवाद में महत्वपूर्ण न्यायिक घटनाक्रम सामने आया है। जिला एवं सत्र न्यायालय, भीलवाड़ा ने थाना सुभाष नगर में दर्ज प्रकरण में पुलिस द्वारा प्रस्तुत की गई अंतिम रिपोर्ट (एफआर) को प्रक्रिया के अनुरूप नहीं मानते हुए मामले में पुनः सुनवाई के आदेश दिए हैं। न्यायालय के इस फैसले से लंबे समय से विवादों में घिरे इस मामले में एक बार फिर न्यायिक प्रक्रिया तेज हो गई है। यह विवाद बांसवाड़ा निवासी प्रदीप कोठारी की न्यू लुक सोसायटी तथा भीलवाड़ा निवासी महेन्द्र पारख द्वारा संचालित न्यू लुक एज्यूकेशन सोसायटी के बीच स्कूल के स्वामित्व एवं संचालन अधिकार को लेकर लंबे समय से चला आ रहा है। दोनों पक्षों के बीच विभिन्न न्यायालयों में भी मामला विचाराधीन रहा है। प्रदीप कोठारी की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता अभिमन्यु जोशी एवं दुर्गा सिंह शेखावत ने बताया कि वर्ष 2025 में थाना सुभाष नगर में दर्ज मुकदमे की जांच के बाद पुलिस ने प्रकरण को असत्य मानते हुए अंतिम रिपोर्ट (एफआर) न्यायालय में प्रस्तुत कर दी थी। अधिवक्ताओं का आरोप है कि यह एफआर 11 जुलाई 2025 को पीड़ित पक्ष की अनुपस्थिति में न्यायालय के समक्ष पेश की गई तथा बिना किसी पूर्व सूचना या आपत्ति का अवसर दिए न्यायालय से स्वीकार भी करा ली गई। इस कार्रवाई को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत बताते हुए प्रदीप कोठारी की ओर से जिला एवं सत्र न्यायालय में निगरानी याचिका (रिवीजन) दायर की गई। याचिका में यह तर्क रखा गया कि एफआर स्वीकार करने से पहले परिवादी को सुनवाई का अवसर दिया जाना आवश्यक था, जबकि ऐसा नहीं किया गया। मामले की सुनवाई के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने प्रस्तुत तथ्यों एवं अभिलेखों का अवलोकन करते हुए निगरानी याचिका स्वीकार कर ली। न्यायालय ने न्यायिक मजिस्ट्रेट (पश्चिम), भीलवाड़ा को निर्देश दिए हैं कि आरोपी महेन्द्र पारख एवं अनिमेश पारख के विरुद्ध दर्ज प्रकरण में विधि के अनुसार पुनः सुनवाई की जाए और सभी पक्षों को सुनने के बाद आगे की कार्रवाई की जाए। न्यायालय के आदेश के बाद अब यह मामला एक बार फिर न्यायिक प्रक्रिया के केंद्र में आ गया है। पुनः सुनवाई के दौरान न्यायालय पुलिस की अंतिम रिपोर्ट, परिवादी की आपत्तियों तथा उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करेगा। इसके बाद ही यह तय होगा कि एफआर को स्वीकार किया जाए या आरोपियों के विरुद्ध आगे की आपराधिक कार्रवाई की जाए। कानूनी जानकारों का मानना है कि जिला एवं सत्र न्यायालय का यह आदेश न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता एवं सभी पक्षों को सुनवाई का समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं, इस फैसले के बाद लंबे समय से विवादों में रहे न्यू लुक सोसायटी स्कूल प्रकरण पर एक बार फिर सभी की नजरें टिक गई हैं।