पेयजल संकट: आसींद पालिका क्षेत्र के वार्ड नंबर एक के तीन गांवों में त्राहि-त्राहि, ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन

दिनेश साहू

आसींद:स्मार्ट हलचल।नगर पालिका क्षेत्र के वार्ड नंबर एक में पेयजल संकट गहरा गया है। क्षेत्र के तीन गांवों—आमली खेड़ा, राजपुरा और अर्जुनपुरा की झोपड़ियां—के ग्रामीणों को बूंद-बूंद पानी के लिए तरसना पड़ रहा है। हालात इतने बदतर हैं कि लोग निजी टैंकर मंगवाकर अपनी जलापूर्ति करने को मजबूर हैं। प्रशासन की अनदेखी से नाराज ग्रामीणों और महिलाओं ने जल संकट को लेकर उग्र विरोध प्रदर्शन किया और व्यवस्था नहीं सुधरने पर आंदोलन की चेतावनी दी।

​ठेकेदार की लापरवाही: एक साल से अधूरी पड़ी है पानी की टंकी
​आमली खेड़ा गांव के निवासी गणेश महाराज ने बताया कि ग्रामीणों को सुचारू रूप से पानी मिल सके, इसके लिए एक वर्ष पूर्व यहाँ एक पानी की टंकी का निर्माण कार्य शुरू करवाया गया था। लेकिन ठेकेदार की घोर लापरवाही के चलते आज तक इसका निर्माण पूर्ण नहीं हो सका है। टंकी का ढांचा अधूरा पड़े होने के कारण तीनों गांवों की जलापूर्ति व्यवस्था ठप है।
​मटमैला पानी पीने को मजबूर,

बीमारी का अंदेशा
​वहीं, राजपुरा की झोपड़ियां की ग्रामीण महिलाओं ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि गांव में सालों से ट्यूबवेल नकारा (खराब) पड़ा हुआ है। पूरे गांव में पानी का एकमात्र सहारा सिर्फ एक हैंडपंप है।
​महिलाओं का कहना है: “इस हैंडपंप से भी काठ युक्त और मटमैला पानी निकल रहा है, जिसे मजबूरी में पीना पड़ रहा है। इस दूषित पानी से गांव में बीमारी फैलने का अंदेशा बना हुआ है।”
​गाँव में बनी पनघट योजना भी पूरी तरह नकारा साबित हो रही है। एकमात्र हैंडपंप होने के कारण दिनभर वहां पानी भरने के लिए महिलाओं की भारी भीड़ और कतारें लगी रहती हैं।
​आंदोलन की चेतावनी
​पेजल किल्लत से आक्रोशित महिलाओं और ग्रामीणों ने मौके पर खाली बर्तन लेकर प्रदर्शन किया। उन्होंने नगर पालिका प्रशासन से मांग की है कि:
​अधूरी पड़ी पानी की टंकी का निर्माण शीघ्र पूरा करवाया जाए।
​खराब पड़े ट्यूबवेल को तुरंत ठीक कर चालू किया जाए।
​ग्रामीणों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि नगर पालिका प्रशासन ने जल्द ही पेयजल की सुचारू व्यवस्था नहीं की, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।