“ अंतरराष्ट्रीय साझेदारी और संस्थागत सहयोग समय की आवश्यकता” — वी. के. जेटली
कोटा का निर्यात बढ़ाकर 5 हजार करोड़ करने की रणनीति पर विदेश में विमर्श
वैश्विक साझेदारी से उद्योगों को नई उड़ान मिले — — वी. के. जेटली
कोटा/कुआलालंपुर।स्मार्ट हलचल|इम्प्लॉयर एसोसिएशन ऑफ राजस्थान (EAR) के ग्लोबल टूर के अंतर्गत वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल ने मलेशिया दौरे के दौरान भारत–मलेशिया औद्योगिक सहयोग को नई गति देने पर उच्चस्तरीय मंथन किया। प्रतिनिधिमंडल ने कुआलालंपुर स्थित भारतीय उच्चायोग के अधिकारियों से भेंट कर निवेश, निर्यात विस्तार और संस्थागत साझेदारी के विभिन्न आयामों पर विस्तृत चर्चा की।
बैठक में कुआलालंपुर स्थित भारतीय उच्चायोग के अधिकारी प्रथम सचिव राजेश एच. मनियिल तथा द्वितीय सचिव (श्रम) आर. एस. चौहान उपस्थित रहे। प्रतिनिधिमंडल में इम्प्लॉयर एसोसिएशन ऑफ राजस्थान (EAR) के मुख्य सलहाकार व करेजियस कम्युनिटी फाउंडेशन के चेयरमैन वी. के. जेटली, मुख्य सलाहकार डॉ. ए. के. जैन, अध्यक्ष एन. के. जैन तथा वरिष्ठ सदस्य किशन पोद्दार शामिल थे।
बैठक के दौरान नवीकरणीय ऊर्जा एवं सौर विनिर्माण, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी एवं ईवी चार्जिंग अवसंरचना, नॉन-वोवन फैब्रिक, टेक्सटाइल एवं तकनीकी वस्त्र, सीमेंट एवं अवसंरचना सामग्री, रीसाइक्लिंग एवं परिपत्र अर्थव्यवस्था, स्विचगियर एवं विद्युत प्रणालियाँ, ईपीसी परियोजनाएँ तथा कुशल कार्यबल विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर विस्तार से विचार किया गया।
डॉ. ए. के. जैन ने मलेशिया की ASEAN क्षेत्र में विनिर्माण एवं निर्यात हब के रूप में रणनीतिक भूमिका को रेखांकित करते हुए स्वच्छ ऊर्जा, उन्नत विद्युत उपकरण निर्माण तथा ईवी अवसंरचना में साझेदारी की व्यापक संभावनाएं बताईं।
वी. के. जेटली ने विशेष रूप से कोटा को केंद्र में रखते हुए कहा कि वर्तमान में कोटा का निर्यात लगभग 1,000 करोड़ रुपये के आसपास है, जिसमें धनिया, स्टोन, कोटा डोरिया सहित अन्य उत्पादों की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सुनियोजित रणनीति और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी के माध्यम से अगले पांच वर्षों में कोटा का निर्यात 5,000 करोड़ रुपये के पार ले जाया जा सकता है।
जेटली ने यह भी कहा कि कोटा अब शिक्षा नगरी के साथ-साथ तेजी से पर्यटन सिटी के रूप में उभर रहा है। चंबल रिवर फ्रंट, चंबल सफारी, गडेरिया महादेव सहित विभिन्न पर्यटन स्थलों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रोत्साहित कर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाया जा सकता है।
चर्चा के दौरान राजस्थान के अन्य औद्योगिक क्षेत्रों पर भी विमर्श हुआ, जिनमें भीलवाड़ा का वस्त्र एवं यार्न उद्योग, चित्तौड़गढ़ का सीमेंट एवं उर्वरक उत्पादन, उदयपुर का फॉस्फेट, अलवर का रासायनिक उद्योग, किशनगढ़ का पावरलूम एवं टेक्सटाइल पार्क, श्रीगंगानगर का चीनी उद्योग, भिवाड़ी (खैरथल-तिजारा) के वृहद उद्योग तथा जयपुर, अलवर और जोधपुर में प्रस्तावित सेमीकंडक्टर परियोजनाएं शामिल रहीं।
किशन पोद्दार ने क्षेत्र-विशिष्ट सहयोग मॉडल और सप्लाई चेन एकीकरण की रूपरेखा प्रस्तुत की। भारतीय उच्चायोग के अधिकारियों ने EAR प्रतिनिधिमंडल की पहल की सराहना करते हुए व्यापार, प्रौद्योगिकी आदान-प्रदान और कौशल विकास के क्षेत्र में सहयोग का आश्वासन दिया।










