(महेन्द्र नागोरी)
भीलवाड़ा |स्मार्ट हलचल|शहर की सरकार कही जाने वाली भीलवाड़ा नगर निगम इन दिनों अपनी कार्यशैली को लेकर चर्चा में है। नगर निगम में महापौर पद से हटाए जाने के 9 दिन बाद भी प्रशासक की नाम पट्टी नहीं लग पाई है। इस मामूली लेकिन महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रक्रिया में देरी को लेकर शहरवासियों में सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, महापौर पद से हटने के बाद निगम में प्रशासक की नियुक्ति कर दी गई थी, लेकिन मुख्य द्वार एवं कार्यालय कक्ष के बाहर अब तक प्रशासक के नाम की पट्टी नहीं लगाई गई है। ऐसे में निगम कार्यालय आने वाले नागरिकों को यह तक स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि वर्तमान में जिम्मेदारी किसके पास है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब निगम प्रशासन एक साधारण नाम पट्टी लगाने जैसे कार्य में 9 दिन का समय ले रहा है, तो शहर के विकास कार्यों की गति का सहज अनुमान लगाया जा सकता है। आमजन का तर्क है कि प्रशासनिक पारदर्शिता और व्यवस्था की शुरुआत ऐसे छोटे-छोटे कार्यों से ही होती है।
इस संबंध में नगर निगम आयुक्त से बातचीत की गई तो उनका कहना था कि नाम पट्टी बनवाने के लिए दे रखी है और जल्द ही इसे लगा दिया जाएगा। हालांकि 9 दिन बीत जाने के बाद भी प्रक्रिया पूरी नहीं होना निगम की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है।
शहर में पहले ही सफाई, सड़कों की मरम्मत, प्रकाश व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाओं को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में प्रशासक की नाम पट्टी तक नहीं लग पाना निगम प्रशासन की सुस्ती को दर्शाता है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि निगम प्रशासन इस छोटे लेकिन प्रतीकात्मक मुद्दे को कितनी गंभीरता से लेता है और शहरवासियों को सुचारू एवं पारदर्शी व्यवस्था का भरोसा दिलाने में कितना सफल होता है।
