“ (महेन्द्र नागौरी)
सत्य परेशान हो सकता है, पर परास्त कभी नहीं” — आचार्य पुलकसागर
पर्युषण के पांचवें दिन उत्तम सत्य धर्म की आराधना; सूर्यमहल में भक्ति में झूमे श्रावक-श्राविकाएं
भीलवाड़ा| स्मार्ट हलचल|झूठ से मिली सफलता भले कुछ पल की हो, लेकिन मन को शांति नहीं दे सकती। सत्य की राह कठिन और कांटों भरी जरूर है, मगर मंजिल हमेशा उसी की होती है। सत्य परेशान हो सकता है, पर परास्त कभी नहीं हो सकता। राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागर महाराज ने रविवार को शास्त्रीनगर स्थित सूर्यमहल में पर्युषण महापर्व के पांचवें दिन उत्तम सत्य धर्म की आराधना के दौरान यह संदेश दिया।
श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट के तत्वावधान में चल रहे आयोजन में भगवान का अभिषेक, शांतिधारा और उत्तम सत्य धर्म का पूजन हुआ। चक्रवर्ती व इन्द्र के रूप में श्रावकों ने अभिषेक किया। भगवान की भक्ति में श्रावक-श्राविकाएं झूम उठे।
आचार्यश्री ने कहा कि झूठ जुबान से निकलता है, लेकिन उसकी जड़ मन में होती है। इसलिए केवल मौन धारण कर लेने से कोई सत्यवादी नहीं बनता। सत्य को जीने के लिए मन की साधना जरूरी है। उन्होंने कहा कि लोभ और लालच से घिरा व्यक्ति उत्तम सत्य को नहीं जी सकता। सत्य कड़वा नहीं होता, हमारा मन कड़वा होता है।
तरुणसागर को याद कर छलके आंसू
प्रवचन के दौरान आचार्य पुलकसागर महाराज ने अपने ज्येष्ठ गुरु भ्राता पूज्य तरुणसागर महाराज के साथ बिताए तीन वर्षों को याद किया। उन्होंने कहा कि तरुणसागर उनके शिक्षा गुरु थे और दोनों की जोड़ी राम-लक्ष्मण जैसी थी। “धर्म के संस्कार गुरुदेव पुष्पदंत सागर से और प्रभावना के संस्कार तरुणसागर से मिले।” दिल्ली में तरुणसागर महाराज की समाधि के दिन उमड़ी भावनाओं को याद करते हुए आचार्यश्री भावुक हो उठे।
पर्युषण के छठे दिन सोमवार को सुगंध दशमी पर उत्तम संयम धर्म की आराधना होगी। दस दिवसीय धार्मिक आयोजन का समापन 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी पर होगा।