शाहपुरा मंडी के लिए किसानों का महा-आंदोलन, विधायक को सौंपा ज्ञापन

शाहपुरा, 18 मार्च।स्मार्ट हलचल|महल चौक में आयोजित जनसुनवाई उस समय आंदोलन का रूप लेती नजर आई जब शाहपुरा व बनेड़ा विधानसभा क्षेत्र के सैकड़ों किसान शाहपुरा कृषि मंडी की बदहाली को लेकर एकजुट हो गए। किसानों ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए विधायक डॉ. लाला राम बैरवा को विस्तृत ज्ञापन सौंपा और मंडी के त्वरित पुनरुद्धार की मांग की।
किसानों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए बताया कि कभी क्षेत्र की आर्थिक धुरी रही मंडी आज बदहाल और व्यापार-विहीन हो चुकी है। मंडी में न तो पारदर्शी नीलामी व्यवस्था है, न किसानों को उचित मूल्य मिल पा रहा है, न ही सही तौल की गारंटी है। इसके साथ ही भंडारण, सुरक्षा और आधारभूत सुविधाओं का भी अभाव बना हुआ है। इस स्थिति के कारण किसानों को मजबूरन अपनी उपज लेकर भीलवाड़ा, केकड़ी, गुलाबपुरा और विजयनगर जैसी दूरस्थ मंडियों में जाना पड़ रहा है, जिससे अतिरिक्त खर्च के साथ-साथ समय और फसल दोनों का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
ज्ञापन में किसानों ने मांग रखी कि मंडी में सभी प्रकार के कृषि उत्पादों—अनाज, दालें, तिलहन, सब्जियां, फल, मसाले, पशु चारा, बीज एवं ऑर्गेनिक उत्पाद—का व्यापार अनिवार्य रूप से स्थानीय स्तर पर ही संचालित किया जाए। साथ ही बड़े व्यापारियों को मंडी से जोड़ा जाए, ताकि प्रतिस्पर्धा बढ़े और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके।
इस दौरान विधायक डॉ. लाला राम बैरवा ने किसानों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और भरोसा दिलाया कि शाहपुरा कृषि मंडी का शीघ्र ही व्यापक विकास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मंडी में कोल्ड स्टोरेज, डिजिटल नीलामी प्रणाली, वे-ब्रिज (वजन पुल), सुरक्षित गोदाम और अन्य आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। साथ ही मंडी में सभी प्रकार के व्यापार को अनिवार्य रूप से संचालित करने की दिशा में प्रशासनिक स्तर पर ठोस कदम उठाए जाएंगे।
विधायक के आश्वासन के बाद किसानों में उत्साह देखने को मिला। किसानों ने कहा कि यदि मंडी का समुचित विकास होता है तो न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे और क्षेत्र का समग्र विकास संभव हो सकेगा।
जनसुनवाई का यह आयोजन किसानों की एकता और उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता का प्रतीक बनकर सामने आया। ग्रामीणों व जनप्रतिनिधियों ने भी उम्मीद जताई कि इस आंदोलन के बाद शाहपुरा की मंडी फिर से क्षेत्र की आर्थिक रीढ़ के रूप में स्थापित होगी और किसानों को अपने ही क्षेत्र में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।