पिता की अंतिम इच्छा को बेटी-दामाद ने किया पूरा, बूंदी मेडिकल कॉलेज में करवाया नेत्रदान के बाद देहदान
बूंदी मेडिकल कॉलेज में शाइन इंडिया फाउंडेशन के माध्यम से यह चौथा देहदान रहा.
बूंदी: स्मार्ट हलचल|जब अपनों के बिछड़ने का दर्द दिल को तोड़ देता है, उसी समय लिए गए कुछ फैसले इंसानियत की सबसे बड़ी मिसाल बन जाते हैं. बूंदी में एक बेटी और दामाद ने अपने पिता को खोने के गहरे दुख के बीच उनकी अंतिम इच्छा को सम्मान देते हुए ऐसा ही एक प्रेरणादायक कार्य किया, ‘नेत्रदान और देहदान’.
निधन के 5 दिन पहले जताई थी इच्छा: शहर के मंडी रोड, देवपुरा निवासी स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद शर्मा के आकस्मिक निधन के बाद, उनके परिवार ने दुख की घड़ी में भी साहस और संवेदनशीलता का परिचय देते हुए उनकी अंतिम इच्छा को साकार किया. राजेंद्र प्रसाद शर्मा ने अपने जीवनकाल में ही देहदान का संकल्प लिया था. मात्र पांच दिन पहले उन्होंने अपनी बेटी मनीषा और दामाद सतीश को यह इच्छा जताई थी कि उनके जाने के बाद उनका शरीर समाज और चिकित्सा शिक्षा के काम आए. उन्होंने स्पष्ट कहा था कि उनकी देह मेडिकल कॉलेज को दान कर दी जाए, ताकि भविष्य के डॉक्टर इससे सीख सकें और कई जिंदगियों को बचाने में सक्षम बन सकें।
बेटी दामाद ने लिया निर्णय
मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभागाध्यक्ष डॉ विजय नायक ने बताया कि मंगलवार को राजेंद्र प्रसाद शर्मा के निधन के बाद मनीषा और सतीश ने शाइन इंडिया फाउंडेशन के ज्योति मित्र इदरीस बोहरा से संपर्क कर पिता के नेत्रदान और देहदान की प्रक्रिया शुरू करने का अनुरोध किया. यह संस्था हाड़ौती क्षेत्र में नेत्रदान के प्रति जागरूकता फैलाने के साथ-साथ अब देहदान जैसे पुनीत कार्यों को भी गति दे रही है.
छात्रों की पढ़ाई और प्रशिक्षण में काम आएगी देह
ईबीएसआर बीबीजे चैप्टर के तकनीशियन डॉ कुलवंत गौड़ ने बूंदी पहुंचकर नेत्रदान की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न किया, नेत्रदान के बाद उनकी देह को राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालय, बूंदी को सौंप दिया गया, यहां उनके शरीर का उपयोग मेडिकल छात्रों की पढ़ाई और प्रशिक्षण में किया जाएगा।
बूंदी मेडिकल कॉलेज में यह चौथा देहदान
इदरीस बोहरा ने बताया कि शाइन इंडिया फाउंडेशन के माध्यम से बूंदी मेडिकल कॉलेज में यह चौथा देहदान है. इससे पहले स्वर्गीय पिंकी छाबड़ा, स्वर्गीय सुरेश विजयवर्गीय और स्वर्गीय प्रेम सिंह परिहार भी अपनी देह चिकित्सा शिक्षा के लिए समर्पित कर चुके हैं. यह आंकड़ा भले छोटा लगे, लेकिन इसके पीछे छिपी भावना और जागरूकता समाज में बड़े बदलाव का संकेत दे रही है. उधर देहदान की प्रक्रिया के दौरान मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभागाध्यक्ष डॉ विजय नायक, अन्य चिकित्सक, संस्था के संस्थापक डॉ कुलवंत गौड़ और बूंदी के ज्योति मित्र इदरीस बोहरा मौजूद रहे.
