गढ़ी-मामोड़ पीएचसी पर महिला स्टाफ के आवास की मांग को लेकर ग्रामीणों का 5 घंटे धरना, गेट पर लगाया ताला

बिन्टू कुमार

बीसीएमओ व सीएचसी प्रभारी के आश्वासन के बाद समाप्त हुआ प्रदर्शन, महिला कर्मी को परिसर में रहने की मिली अनुमति

नारायणपुर |स्मार्ट हलचल|क्षेत्र की ग्राम पंचायत गढ़ी-मामोड़ स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर रात्रिकालीन प्रसव सुविधा बहाल कराने की मांग को लेकर सोमवार को ग्रामीणों ने पीएचसी के मुख्य गेट पर ताला लगाकर करीब 5 घंटे तक धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने महिला नर्सिंग स्टाफ को पुनः पीएचसी परिसर में रहने की अनुमति देने की मांग उठाई, ताकि रात के समय गर्भवती महिलाओं को समय पर प्रसव सुविधा मिल सके।

पूर्व उपप्रधान मातादीन गुर्जर ने बताया कि गढ़ी-मामोड़ पीएचसी पिछले 13 वर्षों से भामाशाह द्वारा उपलब्ध कराए गए भवन में संचालित हो रही है। पीएचसी भवन के ऊपर बने कमरे में अस्थाई रूप से व्यवस्था बनाने के लिए महिला नर्सिंगकर्मी निवास कर रही थीं। रात में प्रसव पीड़ा होने पर वही महिलाओं का सुरक्षित प्रसव कराती थीं और इसके लिए किसी प्रकार का शुल्क भी नहीं लिया जाता था।

उन्होंने बताया कि बानसूर के खंड मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. दीपेन्द्र सिंह द्वारा 23 जुलाई 2025 को जारी आदेश में सरकारी आवास में अनधिकृत रूप से रहने वाले कर्मचारियों से ज्वाइनिंग तिथि से 18 प्रतिशत ब्याज सहित वसूली करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद महिला नर्सिंगकर्मी ने पीएचसी परिसर का कमरा खाली कर दिया। इससे गढ़ी, कोठिया, लादुवास, बास भूरिया, खरकड़ी कला, मालेरा, दुहार माला सहित आसपास के गांवों की गर्भवती महिलाओं को रात्रि में प्रसव के लिए नारायणपुर, बानसूर अथवा कोटपुतली जाना पड़ रहा था।

धरना-प्रदर्शन की सूचना पर बीसीएमओ डॉ. दीपेन्द्र सिंह एवं नारायणपुर सीएचसी प्रभारी डॉ. पूरणमल चौधरी मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों से वार्ता कर उनकी समस्या सुनी। उच्चाधिकारियों से मार्गदर्शन लेने के बाद नोटशीट पर आदेश दर्ज कर महिला नर्सिंगकर्मी को पीएचसी परिसर में रहने की अनुमति प्रदान की गई। इसके बाद ग्रामीणों ने धरना समाप्त कर दिया।

हर दिन 70 मरीजों की ओपीडी, लगातार घटीं संस्थागत डिलीवरी

गढ़ी-मामोड़ पीएचसी पर प्रतिदिन औसतन 70 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। संस्थागत प्रसव के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2020-21 में 119, वर्ष 2021-22 में 71, वर्ष 2022-23 में 44, वर्ष 2024-25 में 30 तथा वर्ष 2025-26 में केवल 18 डिलीवरी दर्ज हुई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि महिला स्टाफ के परिसर में नहीं रहने से रात्रिकालीन प्रसव सेवाएं प्रभावित हुई हैं, जिससे संस्थागत प्रसव में लगातार कमी आई है।

28 जून को पीएचसी के गेट पर ही हुआ था प्रसव

ग्रामीणों ने बताया कि 28 जून को बास भूरिया निवासी मुनेश गुर्जर पत्नी शीशराम को प्रसव पीड़ा होने पर परिजन उन्हें गढ़ी-मामोड़ पीएचसी लेकर पहुंचे, लेकिन उस समय पीएचसी बंद होने के कारण महिला का प्रसव पीएचसी के मुख्य गेट पर ही हो गया, जहां उसने एक पुत्र को जन्म दिया। बाद में प्रसूता को उपचार के लिए नारायणपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया।

धरना-प्रदर्शन के दौरान बलबीर झाबर गुर्जर, राकेश दायमा, पूर्व सरपंच धीरज सैनी, रामेश्वर सैनी, भोमराज शर्मा, मादाराम सैनी, मंगत वर्मा, नत्थूराम प्रजापत, दौलत मीणा, बजरंग मीणा, संजू सैनी, रामकरण सैनी, विजय शर्मा, महेश प्रजापत, नरेश शर्मा, रामजीलाल सैनी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।