एजाज़ अहमद उस्मानी
स्मार्ट हलचल|रमज़ानुल मुबारक के पहले जुम्मा के मौके पर मेड़ता रोड शहर की तमाम मस्जिदों में अकीदतमंदों का सैलाब उमड़ पड़ा। सजदे में झुके हजारों सरों ने अल्लाह तआला से अमन, चैन, तरक्की और इंसानियत की भलाई के लिए दुआएं मांगीं। मस्जिदों का माहौल पूरी तरह रूहानी रंग में रंगा नजर आया, जहां नमाजियों ने पूरे एहतराम और खशूअ-खुज़ू के साथ जुम्मे की नमाज़ अदा की।
जुम्मे के खुत्बे में इमामों ने रमज़ान की फज़ीलत बयान करते हुए रोज़े के मसाइल, उसकी शर्तों और एहतियातों पर तफसील से रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि रोज़ा सिर्फ भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं, बल्कि आंख, कान और ज़बान की हिफाज़त का भी नाम है। रोज़ा इंसान को सब्र, तक़वा और हमदर्दी का सबक देता है।
इमामों ने अपने बयान में इस बात पर जोर दिया कि रमज़ान का महीना रहमत, मग़फिरत और जहन्नम से निजात का महीना है। इस मुबारक महीने में ज्यादा से ज्यादा इबादत, तिलावत-ए-कुरआन, सदक़ा व खैरात और जरूरतमंदों की मदद करने की ताकीद की गई। उन्होंने रोज़ेदारों को झूठ, गीबत और फिजूल बातों से बचने की नसीहत भी दी।
नमाज़ के बाद खास दुआ का एहतमाम किया गया, जिसमें मुल्क में अमन-ओ-अमान, भाईचारे और खुशहाली के लिए दुआएं मांगी गईं। मस्जिदों के बाहर भी रौनक का आलम रहा, जहां लोग एक-दूसरे को रमज़ान की मुबारकबाद देते नजर आए।
रमज़ानुल मुबारक के पहले जुम्मा ने एक बार फिर यह पैगाम दिया कि यह महीना सिर्फ इबादत का ही नहीं, बल्कि इंसानियत, मोहब्बत और आपसी भाईचारे को मजबूत करने का भी है।










