रणवीर सिंह चौहान
भवानी मंडी|स्मार्ट हल चल/ जब इरादे अटल होते हैं तो बाधाएँ रास्ता रोक नहीं सकती, शनिवार को रामगंजमंडी में लीला देवी गुप्ता के नेत्रदान के लिए कोटा से आई हुई शाइन इंडिया फाउंडेशन की टीम जब दरा के जाम में फस गई, तो टीम के डॉक्टर कुलवंत गौड़ ने 3 किलोमीटर पैदल चलकर ट्रेन से रामगंजमंडी पहुंचकर नेत्रदान प्राप्त किया।
शाइन इंडिया फाउंडेशन के नगर संयोजक संजय विजावत ने बताया कि एक विवाह समारोह में भारत विकास परिषद सदस्या शकुंतला गुप्ता को ओम गुप्ता की पत्नी लीला देवी (57 वर्षीया) के निधन का समाचार प्राप्त हुआ वहीं पर उनके साथ भवानीमंडी के नेत्रदान प्रभारी कमलेश गुप्ता दलाल मौजूद थे, दोनों ने जब परिवार से नेत्रदान के लिए चर्चा की तो समाजसेवी परिवार के द्वारा तुरंत नेत्रदान की सहमति प्राप्त हो गई एवं सूचना पर कोटा से डॉक्टर कुलवंत गौड़ ज्योति-रथ को लेकर रामगंजमंडी को रवाना हो गए। परिवार के द्वारा पर्याप्त समय मार्जिन को देखते हुए दोपहर 4:00 बजे का अंतिम संस्कार का समय निर्धारित किया हुआ था परंतु डॉक्टर गौड़ की गाड़ी दरा के जाम में फस गई और समय निकलता जा रहा था, ऐसे में डॉक्टर गौड़ 3 किलोमीटर पैदल चलकर दरा रेलवे स्टेशन पहुंचे और वहां से ट्रेन पड़कर नियत समय पर रामगंजमंडी पहुंचकर परिवार एवं उपस्थित सैकड़ो समाज सदस्यों के सामने नेत्रदान प्राप्त किया तथा उसके बाद अंतिम यात्रा रवाना हुई। नेत्रदान प्रक्रिया में राधेश्याम गुप्ता, मोनु माहेश्वरी, प्रेमचंद गुप्ता इत्यादि ने सहयोग किया।
कमलेश गुप्ता ने बताया कि यह मेड़तवाल समाज से 75 वाँ नेत्रदान प्राप्त हुआ है, समाज में नेत्रदान और रक्तदान की जागरूकता के लिए मेड़तवाल रक्त नेत्र-मित्र समिति का गठन किया गया है, किसी भी शोक संदेश पर समिति के सदस्य परिवार से बातचीत करके नेत्रदान का प्रयास करते हैं और इसके सकरात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं, वही यह रामगंजमंडी का 73 वाँ नेत्रदान हुआ है।
संजय विजावत के अनुसार शाइन इंडिया फाउंडेशन की लगातार कार्यशालाओं एवं जागरूकता गोष्ठियों के कारण अब नेत्रदान विषय घर घर तक पहुंच गया है एवम शोक के समय परिवार से छोटे से निवेदन पर ही नेत्रदान के लिए सहमति प्राप्त हो जाती है।










