माउंट आबू में पहली बार होगा बर्ड फेस्टिवल, तैयारियों ने पकड़ी गति

28-29 नवंबर को जुटेंगे पक्षी विशेषज्ञ, वैज्ञानिक और प्रकृतिप्रेमी; 400 विद्यार्थी लेंगे भाग, एसडीएम राहुल श्रीवास्तव से आयोजन की रूपरेखा पर चर्चा*

उदयपुर, 18 अक्टूबर। स्मार्ट हलचल|अरावली की सुरम्य पहाड़ियों में बसे राजस्थान के एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू में पहली बार पक्षियों और जैव विविधता को समर्पित दो दिवसीय ‘माउंट आबू बर्ड फेस्टिवल-2026’ आयोजित किया जाएगा। आगामी 28 एवं 29 नवंबर को होने वाले इस महोत्सव की तैयारियों को लेकर ग्रीन पीपल सोसायटी (जीपीएस), उदयपुर के प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को माउंट आबू का दौरा किया। प्रतिनिधिमंडल ने उपखंड अधिकारी राहुल श्रीवास्तव से मुलाकात कर आयोजन की तैयारियों, प्रशासनिक समन्वय और विभिन्न गतिविधियों के संबंध में चर्चा की।

बैठक में सोसायटी के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी राहुल भटनागर, उपाध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी विक्रम सिंह तथा इंद्रजीत माथुर ने उपखंड अधिकारी को महोत्सव की प्रस्तावित रूपरेखा से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य माउंट आबू की समृद्ध पक्षी विविधता को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के साथ ही विद्यार्थियों, स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों में प्रकृति एवं वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

*सीआरपीएफ अकादमी के मैदान में होगा आयोजन*

महोत्सव के आयोजन स्थल के संबंध में हाल ही में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की आंतरिक सुरक्षा अकादमी, माउंट आबू के कमांडेंट महेंद्र कुमार एवं डीआईजी भरत भूषण के साथ भी चर्चा की गई थी। इस बैठक में महोत्सव के लिए अकादमी का मैदान निर्धारित किया गया।

ग्रीन पीपल सोसायटी के तत्वावधान में आयोजित होने वाले इस महोत्सव में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया, राजस्थान वन विभाग और सीआरपीएफ की आंतरिक सुरक्षा अकादमी का सहयोग रहेगा। आयोजन में पक्षी विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, वन अधिकारियों, प्रकृतिविदों और पक्षी प्रेमियों की भागीदारी प्रस्तावित है।

*400 विद्यार्थी सीखेंगे पक्षियों की पहचान*

बर्ड फेस्टिवल का प्रमुख आकर्षण विद्यार्थियों की सहभागिता होगी। प्रदेश के विभिन्न विद्यालयों से लगभग 400 विद्यार्थियों को इसमें शामिल करने की योजना है। विद्यार्थियों के लिए चित्रकला प्रतियोगिता, प्रश्नोत्तरी और अन्य जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में बर्ड वॉक और बर्ड ट्रेल के माध्यम से उन्हें प्राकृतिक परिवेश में पक्षियों को देखने, उनकी पहचान करने तथा उनके व्यवहार को समझने का अवसर मिलेगा।

आयोजकों की योजना है कि विद्यार्थियों को केवल प्रतियोगिताओं तक सीमित नहीं रखा जाए, बल्कि उन्हें पक्षियों के प्राकृतिक आवास, पारिस्थितिकी तंत्र में उनकी भूमिका और संरक्षण की आवश्यकता से भी परिचित कराया जाए। इसके साथ ही विद्यालयों में पक्षी संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए शिक्षकों और विद्यार्थियों को दीर्घकालीन गतिविधियों से जोड़ने पर भी जोर रहेगा।

*विशेषज्ञों के व्याख्यान और संरक्षण पर मंथन*

महोत्सव के दौरान भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) के निदेशक गोविंद सागर भारद्वाज तथा बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी (बीएनएचएस) के रजत भार्गव के विशेष व्याख्यान प्रस्तावित हैं। इसके अतिरिक्त वन विभाग के अधिकारियों, वैज्ञानिकों, प्रकृतिविदों और पक्षी विशेषज्ञों के बीच पैनल चर्चा आयोजित की जाएगी।

चर्चा में माउंट आबू और अरावली क्षेत्र की पक्षी विविधता, प्राकृतिक आवासों का संरक्षण, पर्यावरणीय चुनौतियों तथा प्रकृति आधारित पर्यटन की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

*स्वर्गीय अनिल माथुर की स्मृति में मिलेगा संरक्षण पुरस्कार*

माउंट आबू बर्ड फेस्टिवल को क्षेत्र के प्रसिद्ध पक्षी विशेषज्ञ एवं प्रकृतिप्रेमी स्वर्गीय अनिल माथुर की स्मृति को समर्पित किया गया है। महोत्सव के समापन समारोह में ‘अनिल माथुर संरक्षण पुरस्कार’ प्रदान किया जाएगा।

अनिल माथुर वर्ष 1989 से जंगल सफारी, ट्रेकिंग और पर्यावरण संरक्षण अभियानों से जुड़े रहे। वे वर्ष 1990 से डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया के आजीवन सदस्य थे तथा 2010 से 2015 तक माउंट आबू के इको-सेंसिटिव जोन की निगरानी समिति के सदस्य रहे। पर्यटन विभाग ने उन्हें ‘प्रकृति मित्र’ के रूप में भी मान्यता दी थी।

उन्होंने माउंट आबू के पर्यावरण संरक्षण, पर्यटन की वहन क्षमता के आकलन, कचरा प्रबंधन और स्थानीय वनस्पतियों के संरक्षण को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए थे। उनके विचारों और प्रकृति के प्रति समर्पण को आगे बढ़ाना भी इस महोत्सव का एक प्रमुख उद्देश्य है।

*250 से अधिक पक्षी प्रजातियों का अनूठा संसार*

माउंट आबू वन्यजीव अभयारण्य में 250 से अधिक पक्षी प्रजातियां दर्ज की गई हैं। यहां ग्रीन मुनिया, इंडियन पैराडाइज फ्लाईकैचर, क्रेस्टेड सर्पेंट ईगल और इंडियन पिट्टा जैसी प्रजातियां पक्षी प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण हैं। क्षेत्र की विशिष्ट जलवायु, वनस्पति और भौगोलिक परिस्थितियां इसे राजस्थान के अन्य क्षेत्रों से अलग पहचान प्रदान करती हैं।

माउंट आबू की पक्षी विविधता को सामने लाकर महोत्सव के माध्यम से स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के महत्व और उसके संरक्षण की जरूरत को व्यापक स्तर पर रेखांकित किया जाएगा।

*वार्षिक संरक्षण अभियान के रूप में विकसित करने की योजना*

आयोजकों के अनुसार, बर्ड फेस्टिवल को केवल दो दिवसीय कार्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय इसे दीर्घकालीन संरक्षण अभियान के रूप में विकसित करने की योजना है। इसके तहत पक्षी गणना, ई-बर्ड के माध्यम से नागरिक विज्ञान को बढ़ावा देने, विद्यालयों में बर्ड क्लब स्थापित करने, पक्षियों के प्राकृतिक आवासों के पुनर्स्थापन और स्मृति व्याख्यान जैसी गतिविधियों पर काम किया जा सकता है।

आयोजन को प्लास्टिक-मुक्त रखने और पर्यावरण के अनुकूल व्यवस्थाएं विकसित करने पर भी जोर रहेगा। इससे माउंट आबू को पक्षी अवलोकन एवं प्रकृति आधारित पर्यटन के विशिष्ट गंतव्य के रूप में नई पहचान मिलने की उम्मीद है। साथ ही स्थानीय युवाओं, प्रकृति गाइडों और पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए रोजगार एवं आजीविका के नए अवसर विकसित होने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

ग्रीन पीपल सोसायटी के प्रतिनिधिमंडल की उपखंड अधिकारी के साथ हुई चर्चा को इसी दिशा में तैयारियों और प्रशासनिक समन्वय की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। आगामी नवंबर में आयोजित होने वाला यह महोत्सव माउंट आबू की प्राकृतिक विरासत को सामने लाने और नई पीढ़ी को पक्षी एवं पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने का महत्वपूर्ण मंच बन सकता है।