(मोहम्मद आज़ाद नेब)
स्मार्ट हलचल|जहाजपुर पवित्र माह रमज़ान की रहमतों और बरकतों के बीच एक भावुक और प्रेरणादायक नज़ारा उस वक्त देखने को मिला जब अपनी नानी के घर आई चार साल की मासूम बच्ची बिद्त नूर ने अपना पहला रोज़ा रखा। इतनी कम उम्र में रोज़ा रखने की उसकी लगन और मासूमियत ने पूरे परिवार और मोहल्ले का दिल जीत लिया।
रोज़े के दौरान बिद्त नूर पूरे उत्साह के साथ इबादत के माहौल में शामिल रही। ननिहाल पक्ष के परिजनों ने बच्ची का हौसला बढ़ाया और उसके जज़्बे की सराहना की। आसपास के रहने वाले लोगों ने भी उसे दुलार दिया तथा हदिया (उपहार) देकर उसकी हौसला अफज़ाई की।
परिवार के सदस्यों ने बताया कि बच्ची रोज़े के महत्व को समझते हुए खुद ही रोज़ा रखने की जिद कर रही थी। रमज़ान के पाक महीने में उसकी यह मासूम कोशिश सभी के लिए खुशी और गर्व का कारण बन गई।
रमज़ान जहां सब्र, इबादत और इंसानियत का पैगाम देता है, वहीं बिद्त नूर जैसी मासूम बच्चियों की पहल समाज में धार्मिक भावनाओं और संस्कारों की झलक भी दिखाती है। मोहल्ले में दिनभर इस नन्ही रोज़ेदार की चर्चा रही और सभी ने उसके उज्ज्वल भविष्य के लिए दुआएं कीं।










