शिवराज बारवाल मीना
टोंक/उनियारा। स्मार्ट हलचल|जिले की उनियारा पंचायत समिति (मु. अलीगढ़) क्षेत्र की ग्राम पंचायत कुंडेर में प्रधानमंत्री आवास योजना – ग्रामीण के तहत भारी अनियमितता और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आए हैं।
शिकायतकर्ता बबलू पुत्र कालूराम गुर्जर निवासी केरोद ने जिला कलेक्टर, टोंक को लिखित शिकायत देकर निष्पक्ष जांच तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
*बिना निर्माण के भुगतान का आरोप*
शिकायत में आरोप है कि ग्राम पंचायत कुंडेर के गांव केरोद में एक लाभार्थी के नाम पर योजना के तहत बिना वास्तविक आवास निर्माण के ही राशि जारी कर दी गई। संबंधित मकान पहले से पक्का निर्मित बताया गया है। आवास स्वीकृति के बाद जियो-टैगिंग के दौरान खींची गई फोटो भी कथित रूप से गलत अपलोड की गई है। आरोप यह भी है कि लगभग 50 हजार रूपये की कथित रिश्वत लेकर पीएम आवास की फाईल पास की गई तथा किसी अन्य निर्माणाधीन मकान की फोटो संलग्न कर भुगतान स्वीकृत किया गया।
*ग्राम विकास अधिकारी पर सीधे आरोप*
शिकायतकर्ता ने ग्राम विकास अधिकारी पर नियमों को दरकिनार कर पूरी राशि पारित करने का गंभीर आरोप लगाया है। एक स्थानीय फोटोग्राफर पर भी कथित मिलीभगत का आरोप लगाया गया है। शिकायत में मांग की गई है कि पंचायत स्तर पर स्वीकृत आवासों, वास्तविक निर्माण कार्यों और स्वच्छता संबंधी प्रावधानों की भौतिक जांच करवाई जाए, जिससे संभावित गड़बड़ियों का खुलासा हो सके।
*प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल*
यह मामला केवल एक लाभार्थी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल उठाता है कि —
क्या लाभार्थी का भौतिक सत्यापन हुआ था? क्या जियो-टैगिंग और फोटो अपलोड प्रक्रिया नियमों के अनुरूप की गई? ब्लॉक एवं जिला स्तर पर मॉनिटरिंग व्यवस्था कितनी प्रभावी रही? यदि आरोप सत्य पाए जाते हैं, तो यह प्रशासनिक निगरानी तंत्र की गंभीर विफलता मानी जाएगी और सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला बन सकता है।
*आरोप सही पाने इन कानूनी धाराओं में हो सकती है कार्रवाई*
प्रथम दृष्टया मामले में निम्न प्रावधान लागू हो सकते हैं —
भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 (धोखाधड़ी), धारा 467/468 (कूटरचना), धारा 471 (जाली दस्तावेज का उपयोग)। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की संबंधित धाराएं (यदि रिश्वत सिद्ध होती है) राजस्थान पंचायतीराज अधिनियम, 1994 के तहत विभागीय कार्रवाई। सरकारी धन की रिकवरी, निलंबन एवं अनुशासनात्मक कार्यवाही।
*जांच की मांग-कलेक्टर से हस्तक्षेप की अपील*
शिकायतकर्ता ने जिला कलेक्टर से उच्चस्तरीय जांच, दोषियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने, जारी राशि की वसूली तथा भविष्य में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है। बताया गया है कि इस संबंध में पंचायत समिति उनियारा के विकास अधिकारी को भी अवगत कराया जा चुका है तथा राजस्थान संपर्क पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज की गई है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
*“इनका है कहना”*
मामले में पंचायत समिति उनियारा (मु. अलीगढ़) के खंड विकास अधिकारी शंकर लाल मेघवाल ने कहा कि मामला तीन दिन पहले संज्ञान में आया है।जिला कलेक्टर को पुनः शिकायत भेजे जाने की जानकारी मिली है और अब निष्पक्ष जांच करवाई जाएगी।
*प्रशासनिक जवाब देही और कार्यवाही का इंतजार*
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस प्रकरण में कितनी तत्परता दिखाता है। क्या जांच केवल कागजों तक सीमित रहेगी या जिम्मेदारों पर वास्तविक कार्रवाई भी होगी?यदि आरोप प्रमाणित होते हैं, तो यह मामला जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना – ग्रामीण के क्रियान्वयन पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर सकता है।










