रमज़ानुल मुबारक के दूसरे जुम्मा की नमाज़ अकीदत के साथ अदा

एजाज़ अहमद उस्मानी

स्मार्ट हलचल|रमज़ानुल मुबारक के दूसरे जुम्मा पर मेड़ता रोड शहर की मस्जिदों में बड़ी तादाद में नमाज़ियों ने हाज़िरी दी और अकीदत व एहतराम के साथ जुमे की नमाज़ अदा की। सुबह से ही मस्जिदों में रौनक देखने को मिली। नमाज़ से पहले उलेमा और इमामों ने रोज़े की फज़ीलत, सब्र, तक़वा और इंसानियत के पैग़ाम पर रोशनी डाली। ख़ुत्बे में इमामों ने कहा कि रमज़ान का मुबारक महीना रहमत, मग़फ़िरत और जहन्नुम से निजात का महीना है। इस पाक महीने में इबादत के साथ-साथ गरीबों और ज़रूरतमंदों की मदद करना भी बेहद अहम है। उन्होंने नमाज़ियों को सदक़ा, खैरात, ज़कात और फितरा अदा करने की ताकीद की और इसके मसाइल (धार्मिक नियम) विस्तार से बताए। इमामों ने समझाया कि ज़कात इस्लाम के अहम अरकान में से एक है और यह माल को पाक करती है। उन्होंने कहा कि अल्लाह तआला ने मालदार लोगों के माल में गरीबों का हक़ रखा है, इसलिए ज़रूरतमंदों तक उनका हक़ पहुंचाना हर साहिब-ए-निसाब मुसलमान पर फ़र्ज़ है। सदक़ा और खैरात देने से न सिर्फ़ समाज में बराबरी और हमदर्दी का जज़्बा पैदा होता है, बल्कि इंसान के माल और दौलत में बरकत भी होती है। फितरे के बारे में इमामों ने बताया कि ईद-उल-फितर से पहले फितरा अदा करना वाजिब है, ताकि गरीब और जरूरतमंद भी ईद की खुशियों में शरीक हो सकें। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे दिखावे से बचें और खालिस नियत के साथ अल्लाह की रज़ा के लिए मदद करें। नमाज़ के बाद खास दुआ का एहतमाम किया गया, जिसमें मुल्क में अमन-चैन, तरक्की, भाईचारे और इंसानी एकता के लिए दुआएं मांगी गईं। साथ ही बीमारों की सेहत, रोज़ी में बरकत और दुनिया भर में इंसानियत की भलाई के लिए भी हाथ उठाए गए। मस्जिदों के बाहर भी आपसी मोहब्बत और भाईचारे का माहौल देखने को मिला। नमाज़ियों ने एक-दूसरे को रमज़ान की मुबारकबाद दी और समाज में एकता और सौहार्द बनाए रखने का संकल्प लिया। रमज़ान के दूसरे जुम्मे ने एक बार फिर यह पैग़ाम दिया कि यह महीना सिर्फ़ इबादत का ही नहीं, बल्कि इंसानियत, हमदर्दी और भाईचारे को मज़बूत करने का भी है।