गणेश चतुर्थी पर्व आज ,गणेश का शाब्दिक अर्थ है गण+ईश,गण का अर्थ है देवता, ईश अर्थात स्वामी, अर्थात देवताओं के स्वामी

गणेश चतुर्थी पर्व आज ,गणेश का शाब्दिक अर्थ है गण+ईश,गण का अर्थ है देवता, ईश अर्थात स्वामी, अर्थात देवताओं के स्वामी, देवता शब्द ब्रह्म अर्थात औकार का प्रतीक आध्यात्मिक रुप से गणपति को औकार का ही मुल रुप माना गया है, प्रथम पुज्य गणेश जी का, पर्व गणेश चतुर्थी, भाद्रपद शुक्ल पक्ष मे तृतीय सोमवार सुबह 07-07 बजे तक उपरांत चतुर्थी का शुभारम्भ है अत: 14 सितम्बर सोमवार को गणेश चतुर्थी पर्व मनाया जाएगा।
श्रीगणेश जी का जन्म भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी मध्यान्ह काल मे वृश्चिक लग्न मे हूआ था, लग्न मे ग्रह स्थिति द्वितीय भाव मे देव गूरू वृहस्पति स्वग्रही पराक्रम भाव मे उच्च का मंगल बुद्धि स्थान पर उच्च का शुक राहू सप्तम मे उच्च का चंद्रमा दशम मे स्वग्रही सूर्य, लाभ भाव मे उच्च का बुध केतु, एवं मोक्ष भाव मे उच्च के शनि देव बैठै है, लग्नेश, पंचमेश नवमेश, स्वग्रही एवं उच्च के बैठे है जिन से श्री गणेश देवताओं मे प्रथम पुज्य देव बने ।
सनातन धर्म मे धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व है इनका संयोग किसी त्योहार या पर्व पर मिल जाये वो अदभुत एवं दुर्लभ संयोग बनता है,
इस वर्ष भाद्रपद शुक्ल पक्ष चतुर्थी 14 सितम्बर सोमवार को ग्रहों का भ्रमण गोचर अनूसार सूर्य अपनी स्व राशि सिंह, बुध देव अपनी स्व कन्या राशि मे, देव गूरू वृहस्पति उच्च के कर्क राशि मे शुक्र देव अपनी स्व राशि तुला राशि मे राहू कुम्भ, राशि मे केतु सिंह राशि मे शनि देव मीन राशि मे चन्द्र देव चित्रा नक्षत्र दोपहर 01-55 बजे तक उपरांत स्वाति नक्षत्र तुला राशि मे स्वामी शुक्र है, अपार समृद्धि ज्ञान धन एवं भाग्य मे वृद्धि का बना रहे हैं, ब्रहम योग दोपहर 12-46 बजे तक उपरान्त ऐन्द्र योग है, इस दिन रवि योग सूर्योदय से दोपहर 01-55 बजे तक है, वृश्चिक लग्न दोपहर 11 बजे से दिन मे 01-18, बजे तक अमृत का चोघडिया सूर्योदय से सुबह 07- 48 बजे तक शुभ का सुबह 09-19 से 10-51
अभिजीत मूहूर्त दिन मे 11-58 से 12-47 बजे तक चर का दोपहर 01- से शुभारम्भ लाभ अमृत का सायंकाल 06-29, बजे तक,
विजय मुहूर्त दोपहर, 02-26 से 03-15 तक, गोधुलि बेला सायंकाल 06-21 से 06-55 तक श्रेष्ठ है।
मानव विकास मे गणो के सेनापति को गणपति कहते है। जो स्वयं मंगल ग्रह रंग मूंगे के समान इन को सिन्दूर लगा कर चांदी के वर्क लगाते है इनको हरी दोब दुर्वा प्रिय हे लडडूओ का भोग, जनेऊ हरे मुग धूप नैवेद्य पंचामृत माला अगरबती आदि चढाकर पूजन करते है,