भीलवाड़ा 13 सितंबर|स्मार्ट हलचल|श्री गणेश उत्सव प्रबंध एवं सेवा समिति के तत्वाधान 12 दिवसीय गणेश महोत्सव की धूम गणेश चतुर्थी 14 सितंबर सोमवार से शुरू हो जाएगी समिति द्वारा 500 इको फ्रेंडली गणपति प्रतिमाए छोटी व बड़ी तैयार करवाई गई है साथ हि समिति अध्यक्ष उदयलाल समदानी ने बताया कि इस बार मिट्टी व गोबर से बनी छोटी प्रतिमाएं भी समिति ने विशेष तौर पर तैयार करवाई है जो सार्वजनिक स्थानों पर व निजी स्तर पर घरो व प्रतिष्ठानों पर स्थापित की जाएगी समिति द्वारा तैयार करवाई गई प्रतिमाएं पांच जिलों के लिए पंजीयन की गई जिसमें भीलवाड़ा, चित्तौड़, राजसमंद ,उदयपुर अजमेर एवं बूंदी में गणपति प्रतिमाएं वितरित की जाएगी गणेश प्रतिमा वितरण समारोह 14 सितंबर सोमवार को प्रातः 9:30 बजे आर सी व्यास कॉलोनी स्थित अपना घर वृद्धाआश्रम में आयोजित होगा इससे पूर्व पंडितों के नेतृत्व में गणपति प्रतिमाओं की विधि विधान पूर्वक पूजा, अर्चना, महाआरती की जाएगी
गणपति स्थापना और पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक रहेगा। गणेशोत्सव इस बार कई वर्षों में 12 दिनों तक चलेगा और 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन इसका समापन होगा।
गणेश चतुर्थी पर कौन से शुभ योग बन रहे हैं?
गणेश चतुर्थी 2026: गणपति बप्पा के स्वागत की तैयारियां शुरू हो गई हैं। हर साल भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा-अर्चना कर घर और पंडालों में उनकी प्रतिमा स्थापित की जाती है। मान्यता है कि गणेश जी की पूजा करने से जीवन के विघ्न दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का आगमन होता है। इस साल गणेश चतुर्थी को लेकर 13 और 14 सितंबर की तारीख को लेकर कुछ भ्रम है। पंचांग के अनुसार गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर 2026, सोमवार को मनाया जाएगा। इसी दिन गणपति की स्थापना और पूजा की जाएगी। चतुर्थी तिथि 14 सितंबर की सुबह शुरू होगी और अगले दिन 15 सितंबर की सुबह तक रहेगी।
14 सितंबर को होगी गणपति की स्थापना
गणेश चतुर्थी के दिन घरों में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जाती है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार गणपति बप्पा को घर लाते हैं और विधि-विधान से पूजा करते हैं। स्थापना के बाद कई लोग डेढ़, तीन, पांच, सात या बारह दिन तक गणपति की पूजा करते हैं। गणेश पूजा और स्थापना के लिए सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक का समय शुभ बताया गया है। अलग-अलग शहरों में स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा का समय कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है।
गणेश पूजा में क्या-क्या चढ़ाएं
घरों व प्रतिष्ठानों में उत्तर पूर्व ईशान कोण में भगवान गणेश प्रतिमा स्थापित करनी चाहिए गणेश जी की पूजा में दूर्वा, लाल फूल, मोदक, फल और मिठाई का विशेष महत्व माना जाता है। पूजा के लिए सबसे पहले पूजा स्थल की सफाई कर इसके बाद चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर मूर्ति रखने से पहले नीचे थोड़े चावल अक्षत रखें गणेश जी की प्रतिमा स्थापित की जाती है। प्रतिमा स्थापित करने के बाद भगवान गणेश को जल और ।पंचामृत से स्नान कराया जाता है। इसके बाद उन्हें वस्त्र, फूल, दूर्वा और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जाती है। मोदक का भोग लगाया जाता है। इसके बाद गणेश जी की आरती कर प्रसाद बांटा जाता है।
गणपति पूजन में इन चीजों का न करें इस्तेमाल
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गणेश जी को तुलसी दल नहीं चढ़ाया जाता। इसके अलावा केतकी का फूल भी गणेश पूजा में अर्पित नहीं किया जाता। पूजा में हमेशा साफ और साबुत चावल का इस्तेमाल करने की परंपरा है। हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों में पूजा की परंपराओं में थोड़ा अंतर देखने को मिल सकता है।
12 दिन तक चलेगा गणेशोत्सव
गणेश चतुर्थी के साथ ही12 दिवसीय गणेशोत्सव की शुरुआत होगी। इस दौरान घरों और सार्वजनिक पंडालों में गणपति बप्पा की पूजा-अर्चना की जाएगी। सुबह और शाम आरती के साथ भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। गणेशोत्सव का समापन 25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी के दिन होगा। इस दिन बड़ी संख्या में भक्त गणपति की प्रतिमा का विसर्जन करेंगे। हालांकि अपनी परंपरा के अनुसार कई लोग इससे पहले भी गणपति का विसर्जन करते हैं।
गणेश चतुर्थी का धार्मिक महत्व
गणेश जी को विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य देवता माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले गणेश जी का स्मरण और पूजन करने की परंपरा है। मान्यता है कि उनकी पूजा करने से कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और बुद्धि, विवेक तथा समृद्धि की प्राप्ति होती है। गणेश चतुर्थी के दिन भक्त भगवान गणेश से परिवार की सुख-शांति, अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करते हैं। दस दिनों तक चलने वाले इस उत्सव के बाद अनंत चतुर्दशी पर भक्त भावुक होकर गणपति को विदाई देते हैं और अगले साल फिर आने की प्रार्थना करते हैं।