(सफाई सेवा मैराथन-2026’ अभियान)
करधनी के सरकारी विधालय के सामने कचरे का बन रहा यार्ड –निगम ने चलाया सफाई अभियान ,फिर भी कई सवाल खड़े ?
• सरकारी विधालय के नजदीक कचरा जमा,कई बार सड़ता कचरा ,केसे पढ़े विधार्थी ?
• प्रतिदिन सुबह शाम लोग निकलते इसी मार्ग से ताज़ी हवा लेने आखिर केसे मिले स्वस्थ हवा
• हर बार होती कार्यवाही फिर भी कुछ दिन में जमा हो जाता कचरा ,आखिर कौन डाल रहा ,जनता भी उठा रही खाली भूमि का फायदा ,हर कोई डाल जाता कचरा .
नितेश शर्मा
स्मार्ट हलचल|जयपुर नगर निगम द्वारा चलाए जा रहे ‘सफाई सेवा मैराथन-2026’ अभियान के तहत शनिवार को झोटवाडा के करधनी बेरिया हरनाथपुरा स्थित सरकारी विधालय के सामने के खुले प्लाट में में विशेष सफाई अभियान चलाया गया। इस अभियान का नेतृत्व सीएसआई प्रेम सिह वैद और जमादार मोनू शर्मा ने किया।
जयपुर नगर निगम के सफाई सेवा मैराथन अभियान के दौरान एक दर्जन से अधिक सफाई कर्मियों की टीम ने क्षेत्र में व्यापक सफाई कार्य किया। टीम ने खासतौर पर कालवाड़ रोड 206 बीघा ,करधनी सरकारी स्कुल के सामने को साफ-सुथरा बनाने पर ध्यान केंद्रित किया, जहां लंबे समय से जमा कचरे को हटाकर बाहर भेजा गया। इसके अलावा मुख्य सड़कों पर महीनों से जमा गंदगी को भी हटाया गया, जिससे क्षेत्र की सफाई व्यवस्था में स्पष्ट सुधार देखा गया।
इस विशेष अभियान में मौके पर सिआई बंटी ,राजेश ,जमादार शैलेन्द्र आदि अन्य कर्मचारियों ने सक्रिय भूमिका निभाई। सफाई कार्य के बाद आसपास में स्वच्छता का सकारात्मक प्रभाव नजर आया और स्थानीय निवासियों से भी अपील की जा रही है की ,खुले में कचरा न फेके और अगर कोई डालता है तो समझाए जनता का साथ भी जरुरी है .
इस अभियान की युवा नेता एवं युवा समाजसेवी अनुज शर्मा ने सराहना की। उन्होंने सरकार और नगर निगम की पहल को सराहनीय बताते हुए भविष्य में भी ऐसे अभियान जारी रखने की अपेक्षा जताई और सहयोग का आश्वासन दिया।
बार बार हटा रहे कचरा फिर स्कुल के सामने डाल जाते लोग – बड़े सवाल ,क्या हो समाधान ?
करधनी स्थित महात्मा गाँधी सरकारी विधालय के बिलकुल सामने खाली भुमी है जिसे जनता ने अब कूड़ा दान समझ लिया है आखिर एक और सरकारे स्वछता की बाते करती है वही ये वह स्तःन है जहा रोज सुबह और शाम स्थानीय निवासी ,कई अधिकारी ,सरकारी नेता भ्रमण को निकलते रहते है कई बार शिकायत के बाद भी आलम यह है की स्कुल में आने वाले विधार्थी और स्टाफ भी नाक बंद करके निकलने को मजबूर है विधालय के कर्मचारियों ,प्राध्यापक ने भी कई बार निगम ,विभाग को इस कचरे की समस्या से अवगत करवाया था पर कार्य धरातल पर होते ही फिर जनता या आसपास के कई चलते हुए गाडियों में फिर यहाँ कचरा जमा होने लगा इसे देख हर कोई ये ही अंदाजा लगा सकता है की यहा ये सरकारी विधालय में बच्चे कैसे पढ़ते होंगे और आखिर प्रसाशन इस विषय में उचित कार्यवाही क्यों नहीं करना चाहता आखिर भूमि मालिक को खुला प्लाट रखने की अनुमति कैसे है ज्सिमे ये जगह रियाशी है और चारो और बसावट है सामने सरकारी विधालय है निगम के सफाई कर्मचारियों के भी एक बार तो कचरा देख हतः फुल गए की आखिर ये इतना गन्दा और जयादा कचरा इस कदर जमा है की मानो ये कचरे का यार्ड बन रहा है .आखिर बार हटाना कोई बड़ी बात नहीं लेकिन फिर भी वही समस्या कुछ दिन में वापस खड़ी हो जाती हाई आखिर कौन डाल जाता है कचरा ?आखिर क्यों नहीं होती कार्यवाही ?जिसकी जमीं उसको क्यों नहीं मिलता नोटिस ? एसे कई सवाल खड़े है ये सरकारी विधालय है और यहाँ शायद आम जनता या गरीब वर्ग के विधार्थी जयादा आते है इसलिए मामला ठंडा है अगर यही कोई निजी संस्था होती तो धनी लोगो के बच्चे अधिकारियो के बच्चे पढ़ते और शायद फिर यहा कचरा यार्ड नहीं बनता और हर कोई कार्यवाही में आगे आता बस ये मुख्य सड़क और सरकारी विधालय होते हुए एसी हालत है जिसे देख हर कोई चिंतित हो जाता है की कहा स्वस्थ रहे इंसान और केसे चल रहा है ये महात्मा गांधी विधालय ,सरकार और स्थानीय नेताओ और समाज सेवियो के लिए ये बड़ी चुनोती है अगर वो अपने इन जेसे मुख्य मार्गो विधालय के आसपास स्वछता नहीं कर पाए तो फिर अन्य जगहों की तो बात अलग है .
