Homeराजस्थानकोटा-बूंदीशुभभाव से स्वर्ग, अशुभ से नरक की प्राप्ति: आचार्य प्रज्ञासागर जी

शुभभाव से स्वर्ग, अशुभ से नरक की प्राप्ति: आचार्य प्रज्ञासागर जी

भावों की शुद्धि ही मोक्ष का मार्ग: आचार्य प्रज्ञासागर जी
सकारात्मक संगति से जीवन होता श्रेष्ठ: आचार्य प्रज्ञासागर जी मुनिराज

कोटा। स्मार्ट हलचल|सोमवार को तपोभूमि प्रणेता परमपूज्य आचार्य 108 प्रज्ञासागर जी मुनिराज संघ-06 का मंगल विहार वर्धमान फार्म, जगपुरा से पोरवाल भवन, सुभाष नगर के लिए संपन्न हुआ। गुरु आस्था परिवार के चेयरमैन यतिश जैन खेडावाला ने बताया कि प्रातः 9:15 बजे अभिषेक एवं शांतिधारा का आयोजन हुआ। इसके उपरांत अपराह्न 3 बजे शास्त्र स्वाध्याय तथा सायं 6:30 बजे आनंद यात्रा का आयोजन किया गया।
गुरु आस्था परिवार के महामंत्री नवीन जैन दौरया ने बताया कि मंगलवार प्रातः 7 बजे गुरुदेव ससंघ का मंगल विहार पोरवाल भवन से आरंभ होकर महावीर नगर प्रथम पहुंचेगा।
सुभाष नगर में आयोजित सभा के दौरान परमपूज्य आचार्य 108 प्रज्ञासागर जी मुनिराज ने अपने प्रवचन में कहा कि आचार्य कुंदकुंद भगवान का स्पष्ट संदेश है कि “गुरु उपदेश देता है, पर उसका पालन करना आपके अपने हाथ में है। शुभ भाव स्वर्ग के मार्ग खोलते हैं, जबकि अशुभ भाव नरक की ओर ले जाते हैं।”
उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति अपने भावों के अनुरूप ही आचरण करता है। शुभ प्रवृत्तियों से जीवन में सुख और आत्मिक प्रगति मिलती है, जबकि बुरे विचार व कर्म दुख के कारण बनते हैं। आचार्यश्री ने कहा, “धार्मिक कार्यों की अपेक्षा सांसारिक क्रियाओं में अधिक रुचि बढ़ना मन की अशुद्धि का संकेत है। मन और वचन में शुभता तभी आएगी जब भीतर अच्छे विचारों की धारा बहेगी।”
उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति स्वर्ग की इच्छा रखता है, परंतु स्वर्ग प्राप्ति के लिए शुभ संगति, उत्तम चरित्र और शुद्ध भाव आवश्यक हैं। जैसा संग होता है, वैसा ही रंग मन पर चढ़ता है—चोर के साथ चोर और मुनि के साथ मुनि जैसा व्यवहार स्वाभाविक रूप से विकसित होता है।
आचार्यश्री ने उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं से आह्वान किया कि घर-परिवार में प्रेम, शांति और सौहार्द का वातावरण निर्मित करें। जहां कलह और विवाद होते हैं, वहां स्वर्गीय सुख संभव नहीं। उत्तम संगति और सकारात्मक वातावरण से ही जीवन उत्कृष्ट और आनंदमय बनता है।
धर्मसभा में गुरु आस्था परिवार के अध्यक्ष लोकेश जैन,महामंत्री नवीन जैन दौराया, कोषाध्यक्ष अजय जैन खटकीड़ा,मिलाप अजमेरा,महेन्द्र जैन, रोहित जैन, नितेश जैन, शैलेन्द्र जैन, त्रिलोक जैन, विनय शाह, कपिल आगम, अर्पित सराफ, विकास मजीतिया, अनिल दौराया, सौरभ जैन, अजय मेहरू, लोकेश दमदमा, राजीव पाटनी सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे

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