सवाईपुर ( सांवर वैष्णव ):- सवाईपुर कस्बे सहित सोपुरा, सालरिया, ढ़ेलाणा, बड़ला, बनकाखेड़ा, चावंडिया, ककरोलिया माफी, लसाड़िया, रेड़वास, किशनगढ़, कुड़ी, बोरखेड़ा, बोर्डियास, कांदा आदि कई गांवों में सुहागिन महिलाओं ने अखंड सौभाग्य की कामना एवं कुंवारी कन्याओं ने अच्छे वर के लिए गणगौर की पूजा-अर्चना की । सभी जगह महिलाओं द्वारा गौर गौर गोमति, ईसर पूजे पार्वती की आवाज सुनाई दी । महिलाओं एवं कुंवारी कन्याओं ने सज-धजकर माता पार्वती और भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा अर्चना की । महिलाओं ने सौभाग्यवती होने की कामना की, तो कुंवारी कन्याओं ने उत्तम वर की कामना की। गणगौर का पर्व चैत्र कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से आरंभ होकर चैत्र शुक्ल की तृतीया को गणगौर तीज पर व्रत पूजन के साथ समापन होता है । पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माता पार्वती होली के दूसरे दिन अपने मायके चली जाती हैं और 8 दिनों के बाद भगवान शिव उन्हें वापस लेने के लिए आते हैं, इसलिए यह त्योहार होली के दिन से यानी चैत्र महीने की प्रतिपदा से शुरू हो जाता है। इस दिन से सुहागिन महिलाएं और कुंवारी कन्याएं मिट्टी के शिव जी यानी गण और माता पार्वती यानी गौर बनाकर उनकी पूजा करती हैं। इसके बाद चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को गणगौर तीज की पूजा की जाती है ।।













