खखरेरू / फतेहपुर|स्मार्ट हलचल| ग्राम सभा बसवा से कालूपुर संपर्क मार्ग पर लगभग ढाई किलोमीटर लंबाई में चल रहे डामरीकरण कार्य में गंभीर अनियमिताएँ सामने आ रही हैं। निर्माण कार्य में ठेकेदार द्वारा खुलेआम बाल श्रमिकों से मजदूरी कराई जा रही है, जो शासन-प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों और बाल श्रम निषेध कानूनों का सीधा उल्लंघन है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सड़क निर्माण स्थल पर रेड़ी के माध्यम से गिट्टी ढोने का कार्य नाबालिग बच्चों से कराया जा रहा है। बताया जा रहा है कि निर्माण कार्य में करीब आधा दर्जन बाल श्रमिक लगाए गए हैं। जिन हाथों में किताबें और कलम होनी चाहिए, उन्हीं हाथों में ठेकेदार ने मजदूरी थमा दी है।
सरकार द्वारा बाल श्रम रोकने के लिए बाल श्रमिक आयोग का गठन किया गया है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि यह व्यवस्था केवल कागजों तक ही सीमित दिखाई दे रही है। सरकारी निर्माण कार्यों में ही बाल मजदूरी का खुलेआम होना प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
गरीबी और थोड़े से पैसों के लालच में बच्चों का भविष्य अंधकार में धकेला जा रहा है, और न तो कोई रोकने वाला है, न टोकने वाला। यह स्थिति केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि सामाजिक अपराध भी है।
अब सवाल यह है कि —
क्या जिम्मेदार विभागीय अधिकारी इस पर संज्ञान लेंगे?
क्या ठेकेदार पर कार्रवाई होगी?
या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा?
यह सिर्फ एक सड़क निर्माण की कहानी नहीं, बल्कि व्यवस्था की संवेदनहीनता और सिस्टम की विफलता का आईना है।

