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*कुछ समय की देरी ले सकती थी बच्चों की जान, प्रशासन की गंभीर लापरवाही*
लाखेरी -स्मार्ट हलचल| गेंडोली अंतगर्त फोलाई ग्राम पंचायत के भैंसखेड़ा गांव में मंगलवार को एक भयावह हादसा होते-होते टल गया। गांव के सरकारी विद्यालय की एक कक्षा की जर्जर छत अचानक भरभराकर गिर गई, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। सौभाग्यवश हादसे के समय विद्यालय कक्षा कक्ष में बच्चे मौजूद नहीं थे, जिससे एक बड़ी जनहानि टल गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार घटना से महज 10 मिनट पहले ही बच्चों को कक्षा से बाहर निकाला गया था। कुछ ही पलों बाद कक्षा की छत ढह गई। यदि यह हादसा पढ़ाई के दौरान होता, तो मासूम बच्चों की जान खतरे में पड़ सकती थी और झालावाड़ जैसी हृदयविदारक घटना दोहराई जा सकती थी।
*झालावाड़ हादसे की यादें ताजा, ग्रामीणों में दहशत*
इस घटना ने हाल ही में झालावाड़ जिले में हुए स्कूल भवन हादसे की यादें ताजा कर दीं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि शिक्षक समय रहते बच्चों को बाहर नहीं निकालते, तो हालात बेहद भयावह हो सकते थे। गांव में घटना के बाद भय और आक्रोश का माहौल है। इससे प्रतीत हो रहा है कि सरकारी आदेशों की खुली अवहेलना की जा रही है।
ग्रामीणों और अभिभावकों ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार द्वारा जर्जर और खंडहर विद्यालय भवनों में बच्चों को बैठाने पर रोक के स्पष्ट आदेश जारी किए जा चुके हैं, इसके बावजूद भैंसखेड़ा विद्यालय सहित कई स्कूलों में इन आदेशों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि खंडहर की हालत में पहुंचे विद्यालय भवनों की न तो मरम्मत करवाई गई और न ही उन्हें जमींदोज किया गया, जबकि विभाग को इसकी जानकारी लंबे समय से थी।
*शिक्षकों की सतर्कता से टली अनहोनी*
विद्यालय के एक शिक्षक ने बताया कि हादसे से करीब 10 मिनट पहले ही मैंने बच्चों को उस कक्षा से बाहर निकाल लिया था। यदि थोड़ी भी देर हो जाती, तो किसी अनहोनी से इनकार नहीं किया जा सकता था।
*बच्चों की जान से खिलवाड़ का आरोप*
ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रधानाध्यापक व शिक्षक स्वयं जर्जर कमरों में बैठते हैं और बच्चों को भी उन्हीं कमरों में पढ़ाया जाता है, जो सीधे तौर पर बच्चों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। यह लापरवाही देश के भविष्य माने जाने वाले बच्चों की जान पर भारी पड़ सकती है। शिक्षा विभाग कटघरे में खड़ा है। यह घटना सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति और शिक्षा विभाग की उदासीन कार्यप्रणाली को उजागर करती है। ग्रामीणों का कहना है कि झालावाड़ हादसे के बाद ही प्रशासन की नींद खुली, लेकिन जमीनी स्तर पर अब तक ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
ग्रामीणों ने मांग की है कि जर्जर विद्यालय भवनों की तत्काल तकनीकी जांच कराई जाए
खंडहर कक्षाओं को तुरंत सील किया जाए।
*जिम्मेदार प्रधानाध्यापक व अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो*
बच्चों के लिए सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो वे जन आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
फिलहाल प्रशासन ने मामले की जांच का आश्वासन दिया है, लेकिन ग्रामीण अब सिर्फ आश्वासन नहीं, ठोस कार्रवाई चाहते हैं।


