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रामपुरा में जैन रामकथा का भव्य शुभारंभ, मुनि श्री जयकीर्ति जी की मंगल देशना से गुंजायमान हुआ परिसर

कोटा। स्मार्ट हलचल|परम पूज्य ध्यान दिवाकर, अनुष्ठान विशेषज्ञ एवं विशिष्ट जैन राम कथाकार मुनि श्री जयकीर्ति जी गुरुदेव के सान्निध्य में जैन रामकथा का शुभारंभ धार्मिक उल्लास और भक्ति भाव के बीच हुआ। प्रथम दिन श्रद्धालुओं ने मंगल प्रवेश के साथ मुनिश्री का पाद प्रक्षालन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहीं।
अकलंक स्कूल रामपुरा में मुनिश्री जयकीर्ति जी ने पद्मपुराण के आधार पर भगवान श्रीराम के जीवन की आध्यात्मिक व्याख्या प्रस्तुत की। उन्होंने श्रीराम के आदर्शों, तप, संयम, भक्ति और धर्मनिष्ठा के सूत्रों को जीवन में अपनाने का आग्रह किया। गुरुदेव ने बताया कि श्रीराम का चरित्र सत्य, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा का आदर्श है, जो प्रत्येक मानव को धर्ममार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उनके प्रवचन का सार तपस्या, संयम और सत्कार्यों के महत्व पर केंद्रित रहा।
अध्यक्ष पीयूष बज एवं सचिव अनिमेष जैन ने बताया कि कार्यक्रम का मंच उद्घाटन अंकित जैन (ओएसडी, लोकसभा अध्यक्ष) एवं सकल दिगम्बर जैन समाज अध्यक्ष प्रकाश बज द्वारा संपन्न हुआ। इस अवसर पर विमल मुवासा, कैलाश जैसवाल, कमल सेठी, चांदमल गंगवाल, दीपचंद पहाड़िया, जिनेन्द्र पापड़ीवाल, राकेश चपलमन, महावीर ठग, चेतन प्रकाश, रविन्द्र बाकलीवाल सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।
जिनेन्द्र पापड़ीवाल व राकेश चपलमन ने बताया कि पद्मपुराण आधारित जैन रामकथा का शुभारंभ जिनवाणी माता की भव्य मंगल यात्रा के साथ हुआ, जिसमें चेतन जैन–शीला जैन परिवार द्वारा गाजे-बाजे के साथ जिनमंदिर से मंगल प्रवेश निकाला गया। तत्पश्चात ध्वजारोहण विधिवत पीयूष, मनीष,अनिल आलौकिक एवं स्वप्निल बज परिवार द्वारा किया गया।
मंडप उद्घाटन और दीप प्रज्वलन के पश्चात अकलंक स्कूल की छात्राओं ने मंगलाचरण प्रस्तुति से वातावरण को धर्ममय बना दिया। समाज के प्रमुख श्रावकों ने पूज्य गुरुदेव को अर्घ्य अर्पित किया। मुख्य श्रोता राजा श्रेणिक मनोज जैन (सुखालपुर) परिवार का आगमन भक्ति नृत्य के साथ हुआ तथा बाकलीवाल परिवार द्वारा मंगल कलश स्थापना की गई। इसके पश्चात गुरुदेव ने राजा श्रेणिक की जिज्ञासाओं के समाधान के रूप में मंगल देशना आरंभ की।
रामकथा के प्रथम दिवस का आध्यात्मिक परिवेश भक्तों को भाव-विभोर कर गया। मुनिश्री के ओजस्वी वाणी से निकले श्रीराम के आदर्शों के मंत्रमुग्ध कर देने वाले वर्णन ने पूरे कथा स्थल को अयोध्या के अध्यात्ममय वातावरण में परिवर्तित कर दिया। श्रद्धालुओं ने बताया कि ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो वे स्वयं भगवान श्रीराम के चरणों में उपस्थित हों। कथा में उपस्थित जनसमूह में अत्यंत उत्साह और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला।

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