हमीरगढ़ में धूमधाम से मना गणगौर महोत्सव,लोक संस्कृति का अनूठा संगम

मुकेश खटीक
मंगरोप।हमीरगढ़ राजपरिवार द्वारा हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी गणगौर पर्व का भव्य आयोजन रावले में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ हर्षोल्लासपूर्वक किया गया।कार्यक्रम में पारंपरिक संस्कृति,श्रद्धा और सामाजिक सौहार्द का अद्भुत संगम देखने को मिला।हर्ष प्रदीप सिंह राणावत ने जानकारी देते हुए बताया कि रावत युग प्रदीप सिंह राणावत के सानिध्य में गणगौर महोत्सव बड़े ही धूमधाम और परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ आयोजित किया गया।बताया गया है कि पिछले तीन वर्षों से यह आयोजन रावला परिसर में ही किया जा रहा है।इस अवसर पर कस्बे की महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सजी-धजी बड़ी संख्या में उपस्थित रहीं।महिलाओं ने ईसर-गणगौर की विधिवत पूजा-अर्चना कर अपने सुहाग की लंबी उम्र की कामना की।परंपरा के अनुसार महिलाओं ने व्रत रखा और गणगौर को पानी पिलाने की रस्म निभाई।शनिवार को महिलाएं और युवतियां पारंपरिक गीत गाते हुए गणगौर व ईसर को राजभवन लेकर पहुंचीं।कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने गणगौर के चारों ओर घूमर नृत्य प्रस्तुत किया,वहीं लोक कलाकारों द्वारा पारंपरिक गैर नृत्य ने दर्शकों का मन मोह लिया।लाल परिधान और कीमती आभूषणों से सजी गणगौर माता चांदी की पालकी में विराजमान थीं।जिनके दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी।ड्रोन से पुष्प वर्षा कर आयोजन को और भी आकर्षक बनाया गया।देर रात तक चले इस आयोजन में राजस्थानी लोक संस्कृति की विविध छटा देखने को मिली। राजभवन रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगा उठा।कार्यक्रम में शहनाई,बैंड-बाजा,तोपों की सलामी और आतिशबाजी ने माहौल को उत्सवमय बना दिया।सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में मयूर नृत्य सहित विभिन्न राजस्थानी लोक नृत्यों ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।