संजय चौरसिया
हरनावदाशाहजी।स्मार्ट हलचल|शिक्षा विभाग के तमाम दावों के बावजूद ग्रामीण अंचलों में सरकारी विद्यालयों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। बारां जिले के छीपाबड़ौद क्षेत्र के कस्बा हरनावदाशाहजी स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में शिक्षकों और कर्मचारियों की भारी कमी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है।विभागीय लापरवाही और वर्षों से लंबित पदों के चलते विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था चरमराई हुई है।आधा शैक्षणिक सत्र निकल जाने के बाद भी विद्यालय में व्यवस्थाएं पूरी नहीं हो सकी हैं।
कार्यवाहक प्रधानाचार्य महेंद्र नागर ने बताया कि विद्यालय में इस सत्र में 900 से अधिक छात्र-छात्राओं का नामांकन हुआ है। इतने बड़े विद्यार्थी वर्ग को पढ़ाने के लिए विद्यालय में मात्र 16 शिक्षक हैं। इनमें 13 पुरुष शिक्षक, 3 महिला शिक्षिकाएं, एक पीटीआई और एक लाइब्रेरियन शामिल है। प्रधानाचार्य, संस्कृत व्याख्याता, कंप्यूटर शिक्षक, स्पेशल एजुकेटर, वरिष्ठ सहायक, वरिष्ठ लिपिक और दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के पद लंबे समय से रिक्त हैं।
शिक्षक संभाल रहे हैं एलडीसी का दफ्तर
एलडीसी का पद वर्षों से रिक्त होने के कारण विद्यालय में शिक्षकों को ही प्रशासनिक कामकाज संभालना पड़ रहा है। कई बार शिक्षकों को दफ्तर के काम में इतना व्यस्त रहना पड़ता है कि वे कक्षाओं तक नहीं पहुँच पाते। छात्रों का कहना है कि शिक्षक जब पढ़ाने नहीं आते तो पूरी कक्षा का समय व्यर्थ चला जाता है।
तीन संकाय खुले, पर शिक्षक नहीं
सरकार ने इस वर्ष विद्यालय में वाणिज्य, विज्ञान और कृषि संकाय स्वीकृत किए हैं,लेकिन अब तक इन संकायों के लिए शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हुई है। इन विषयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को वैकल्पिक व्यवस्था के तहत सीमित मार्गदर्शन मिल रहा है,जिससे उनकी पढ़ाई और भविष्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं।अभिभावकों का कहना है कि यदि सरकार ने संकाय खोले हैं तो उसके अनुरूप शिक्षकों की तैनाती भी तुरंत की जानी चाहिए।
कर्मचारी नहीं, व्यवस्था अस्त-व्यस्त
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, वरिष्ठ सहायक और लिपिक के पद खाली रहने से विद्यालय का प्रशासनिक कामकाज भी बाधित है।दस्तावेजी कार्य, परिणाम तैयारी और सरकारी सूचनाओं का रिकॉर्ड समय पर अपडेट नहीं हो पा रहा।शिक्षकों को पढ़ाई छोड़कर दफ्तरी काम करना पड़ रहा है, जिससे शिक्षा का स्तर लगातार गिर रहा है।
विद्यार्थियों और अभिभावकों ने जताई नाराजगी
विद्यालय के विद्यार्थियों ने बताया कि कई विषयों में नियमित शिक्षण नहीं हो पा रहा है।कक्षा 11वीं और 12वीं के छात्र सबसे अधिक प्रभावित हैं,क्योंकि व्याख्याताओं के अभाव में उन्हें आत्म-अध्ययन या पुराने नोट्स के भरोसे रहना पड़ता है।अभिभावकों ने बताया कि विभाग को बार-बार शिकायतें देने के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।सरकार केवल घोषणाओं तक सीमित है, जबकि जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है।
नियुक्ति की उठाई मांग
विद्यालय परिवार, विद्यार्थियों और अभिभावकों ने शिक्षा विभाग से मांग की है कि कला, वाणिज्य, विज्ञान और कृषि संकाय सहित सभी विषयों के रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्ति की जाए।उन्होंने कहा कि यदि शिक्षकों की कमी दूर नहीं की गई, तो विद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता और परिणामों पर गंभीर असर पड़ेगा।













