सावर सीएचसी में स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी: एक्स-रे मशीन सात माह से बंद, विशेषज्ञ डॉक्टरों और कर्मचारियों के दर्जनों पद रिक्त, मरीजों पर बढ़ रहा आर्थिक बोझ

दिलखुश मोटीस

सावर(अजमेर)@स्मार्ट हलचल।उपखंड क्षेत्र का राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) सावर इन दिनों स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर बदहाली से जूझ रहा है। करोड़ों रुपए की लागत से संचालित यह अस्पताल क्षेत्र के हजारों लोगों के लिए प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र है, लेकिन यहां बुनियादी सुविधाओं और विशेषज्ञ चिकित्सकों की भारी कमी के कारण मरीजों को उपचार के लिए भटकना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि अस्पताल में लगी एक्स-रे मशीन पिछले सात महीनों से बंद पड़ी है, जबकि सोनोग्राफी मशीन उपलब्ध होने के बावजूद उसे संचालित करने वाला विशेषज्ञ नहीं होने से मरीजों को उसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले गरीब और जरूरतमंद मरीज बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर सावर सीएचसी पहुंचते हैं, लेकिन सुविधाओं के अभाव में उन्हें निराश होकर लौटना पड़ता है। एक्स-रे सुविधा बंद होने के कारण मरीजों को मजबूरन केकड़ी और देवली के निजी अस्पतालों एवं जांच केंद्रों का रुख करना पड़ रहा है। वहां जांच करवाने में 500 से 800 रुपए तक खर्च करने पड़ रहे हैं। इसके अलावा निजी वाहन से आने-जाने पर केकड़ी के लिए लगभग 700 रुपए तथा देवली के लिए 600 रुपए तक का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है। केकड़ी जाने वाले मरीजों को गुड़गांव टोल पर आवागमन के लिए लगभग 100 रुपए अतिरिक्त चुकाने पड़ते हैं। ऐसे में एक साधारण जांच भी गरीब परिवारों की जेब पर भारी पड़ रही है।

केवल नाम का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र

क्षेत्रवासियों का आरोप है कि सावर सीएचसी अब केवल सामान्य उपचार तक ही सीमित होकर रह गया है। गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद अन्यत्र रेफर कर दिया जाता है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण अधिकांश मरीजों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल में सोनोग्राफी मशीन होने के बावजूद विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं होने से यह सुविधा भी लगभग बंद पड़ी है। मरीज उम्मीद लेकर आते हैं लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लगती है।

18 चिकित्सकों के पद स्वीकृत, कई महत्वपूर्ण पद खाली

सावर सीएचसी में कुल 18 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से कई महत्वपूर्ण पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। कनिष्ठ विशेषज्ञ के पांच पदों में फिजिशियन, सर्जन, बाल रोग विशेषज्ञ, अस्थि रोग विशेषज्ञ और निश्चेतना विशेषज्ञ के पद शामिल हैं, जो वर्तमान में खाली हैं। इसके अलावा वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी के दो पद तथा चिकित्सा अधिकारी के चारों पद भी रिक्त हैं।
हालांकि वर्तमान में अस्पताल में 11 चिकित्सकों का वेतन उठ रहा है, लेकिन इनमें से एक चिकित्सक डॉ अनीता किशनगढ़ ब्लॉक में डेपुटेशन पर कार्यरत हैं। वर्तमान में अस्पताल में प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. रीटा गुप्ता, दंत चिकित्सक डॉ. वैशाली मीणा और डॉ. आदित्य जोशी, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. ललित शेखावत, ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. पायल वर्मा तथा उप निदेशक डॉ. मुकेश नोगिया सहित अन्य चिकित्सक सेवाएं दे रहे हैं।

नर्सिंग और तकनीकी स्टाफ में भी भारी कमी

अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर होने के बावजूद कई महत्वपूर्ण तकनीकी पद रिक्त पड़े हैं।
सीनियर नर्सिंग ऑफिसर के 2 पद स्वीकृत, 1 रिक्त
नर्सिंग ऑफिसर के 15 पद स्वीकृत, सभी भरे हुए
एलएचवी के 2 पद स्वीकृत, कोई रिक्त नहीं
एएनएम के 2 पद स्वीकृत, 1 रिक्त
फार्मासिस्ट प्रथम श्रेणी का 1 पद रिक्त
सहायक रेडियोग्राफर के 4 पदों में 2 रिक्त
तकनीकी सहायक के 2 पदों में 1 रिक्त
सीनियर लैब टेक्नीशियन के 3 पदों में सभी 3 रिक्त
लैब टेक्नीशियन के 5 पदों में 2 रिक्त
कंप्यूटर रिसोर्स असिस्टेंट के 3 पदों में सभी 3 रिक्त
डेंटल टेक्निशियन का 1 पद रिक्त
कनिष्ठ लेखाकार, वरिष्ठ सहायक और कनिष्ठ सहायक के पद रिक्त
वार्ड बॉय के 6 पदों में 5 रिक्त

सफाई कर्मचारी के 4 पदों में सभी 4 रिक्त

विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी कर्मचारियों और सहायक स्टाफ की कमी का सीधा असर मरीजों को मिलने वाली सेवाओं पर पड़ रहा है।

ट्रोमा सेंटर भी स्टाफ संकट से जूझ रहा

सावर स्थित राजकीय ट्रोमा सेंटर की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। यहां डॉक्टरों के कुल छह पद स्वीकृत हैं, लेकिन कई पद रिक्त पड़े हैं।
ट्रोमा कनिष्ठ विशेषज्ञ का 1 पद रिक्त
ऑर्थो चिकित्सा अधिकारी के 3 पदों में 1 रिक्त
सर्जरी चिकित्सा अधिकारी के 2 पदों में 1 रिक्त
एक चिकित्सक उच्च शिक्षा के लिए अवकाश पर
नर्सिंग ऑफिसर के सभी 10 पद भरे हुए
ट्रोमा सेंटर में विशेषज्ञों की कमी के कारण सड़क दुर्घटनाओं और गंभीर मामलों में मरीजों को अजमेर, भीलवाड़ा और अन्य बड़े अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है।

क्षेत्रवासियों में बढ़ रहा आक्रोश

क्षेत्र के लोगों का कहना है कि सावर सीएचसी और ट्रोमा सेंटर को वर्षों पहले क्षेत्र की बढ़ती आबादी और जरूरतों को देखते हुए विकसित किया गया था, लेकिन पर्याप्त स्टाफ और संसाधनों के अभाव में इसका उद्देश्य अधूरा रह गया है। लोगों ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि बंद पड़ी एक्स-रे मशीन को तत्काल चालू कराया जाए, सोनोग्राफी विशेषज्ञ की नियुक्ति की जाए तथा रिक्त पदों को शीघ्र भरा जाए ताकि क्षेत्र के गरीब मरीजों को राहत मिल सके।

वर्तमान में ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी सावर डॉ राजेश गुप्ता व उनकी पत्नी डॉ रीटा गुप्ता अपने पारिवारिक शादी समारोह के चलते 10 जुन से छुट्टियों में चल रहे हैं।