हेमंत कोठारी “नाकोड़ा जी” का जाना एक युग का अंत

ओम जैन

शंभूपुरा।स्मार्ट हलचल|भाई मात्र 20 रुपये लेकर आया था शंभूपुरा में, जो भी दिया भगवान ने यही दिया फिर बचाकर कहा रखना है सतकार्यो में अपने हाथ से जितने खर्च हो अच्छा है, यह बात कहा करते थे शंभूपुरा जैन समाज के गौरव ओर समाज सेवा में क्षेत्र ही नही बल्कि पूरे जिलेभर में सबसे अग्रणीय रहने वाले शंभूपुरा नाकोड़ा रेस्टोरेंट के मालिक स्वर्गीय हेमंत जी कोठारी जिन्हें लोग नाकोड़ा सेठ जी के नाम से जानते थे, उनका जाना जैसे क्षेत्र में एक युग का अंत हुआ है।
लम्बी बीमारी के बाद 10 दिन से उदयपुर में उपचाररत कोठारी ने 17 फरवरी मंगलवार को देह त्याग दी, उनके निधन के समाचार देर रात्रि को जैसे ही लोगो को मिले क्षेत्र में शोक की लहर छा गई, रात को ही लोग उनके घर पहुंच गए और अंतिम दर्शन के लिए पार्थिव देह का इंतजार करने लगे।
18 फरवरी बुधवार सुबह उनके अंतिम दर्शन में सेकड़ो लोगो की भीड़ उमड़ पड़ी, हर किसी को उनके जाने का गम था, क्योकि उनका जुड़ाव ना सिर्फ जैन समाज से बल्कि 36 कॉम के हर छोटे बड़े व्यक्ति से था।

सेकड़ो लोग पहुंचे अंतिम संस्कार में

कोठारी के अंतिम दर्शन के बाद सेकड़ो की संख्या में लोग उनके अंतिम संस्कार में शामिल हुए, ऐसा नजारा पहली बार देखने को मिला कि हर कॉम का वहा व्यक्ति था और शंभूपुरा सहित सावा, कन्नौज, पाटनिया, बामनिया, चित्तौड़, निम्बाहेड़ा, नीमच, मंदसौर आदि से सेकड़ो की संख्या में लोग अंतिम संस्कार में शामिल होकर उन्हें श्रदांजिल अर्पित की, इसेसे पता चलता कि कोठारी कितने मिलनसार ओर सरल स्वभावी थे।

जीव प्रेमी थे कोठारी पूरी यात्रा में साथ चला स्वान

कोठारी ना सिर्फ इंसानों से स्नेह रखते बल्कि जीव प्रेमी भी थे, इस बात का पता इसी से चलता कि एक स्वान ( कुत्ता ) जो उनकी मौत के समाचार से काफी दुखी था जो सुबह उनकी पार्थिव देह के पास ही बैठा रहा, पूरी अंतिम यात्रा में साथ चला पूरे अंतिम संस्कार में वही बैठा रहकर वापस भी अंतिम संस्कार होने के बाद ही सबके साथ घर लौटा ओर आकर घर के बाहर बैठ गया।

दानवीर कोठारी के किस्से सुनाते नजर आए लोग

जैन समाज के गौरव हेमंत कोठारी ना सिर्फ अपनी समाज को सपोर्ट करते थे बल्कि उनके वहाँ चंदे या सहयोग के लिए कोई भी पहुंच जाता अभी किसी को निराश नही करते, किसी को कभी खाली हाथ लौटते वहा से नही देखा गया चाहे कोई भी कार्यक्रम किसी भी सम्प्रदाय का हो, रसीद बुक लेकर कभी उन्होंने पैसा अपने हाथ से नही भरा हमेशा वो कहते आपके हिसाब से भर दो, जो भर देते वो पैसे सरलता के साथ देने के बाद भी कहते कार्यक्रम अच्छा करना कम पड़े तो मैं बैठा हूँ, ऐसे सामाजिक और धार्मिक प्रवृत्ति के कोठारी के जाने से हर कोई दुखी नजर आया।

कही भी धार्मिक कार्य हो भामाशाह में पहला नाम कोठारी का

हेमन्त कोठारी सिर्फ शंभूपुरा में नही बल्कि जिलेभर में इस बात के लिए जाने जाते थे कि कही भी कोई भी धार्मिक कार्यक्रम हो भामाशाह में उनका नाम सबसे पहले आता, चाहे वो शंभूपुरा में हनुमान मंदिर जीर्णोद्धार की बात हो तो उन्होंने सबसे पहले सहयोग राशि लिखवाई, अरनिया पंथ में हनुमान मन्दिर की चारदीवारी निर्माण करवाया, जैन मंदिर या अन्य किसी भी मन्दिर का निर्माण हो या जीर्णोद्धार सभी मे कोठारी ने बढ़चढ़ कर भाग लिया।

20 साल पहले शुरू हुई खाटू भजन संध्या के कर्णधार रहे कोठारी

शंभूपुरा में खाटू भजन संध्या जो कि करीब 20 साल पहले शुरू हुई थी जब कोठारी नए नए ही आये हुए थे ग्रामीणों ने उनसे इस कार्यक्रम की चर्चा की तो सबसे पहले आगे आये और बोला कि पैसे की कोई चिंता मत करो बाबा का कार्यक्रम करो सब हो जाएगा, यह कहते हुए सबसे पहले उस समय सबसे बड़ा सहयोग करके कार्यक्रम शुरू करवाया और उस दिन से अभी तक हर साल इस कार्यक्रम को हमेशा सबसे ज्यादा सहयोग उनका रहा है, ओर हर कार्यक्रम में उनकी उपस्थिति रही, यही नही उन्होंने यह भी घोषणा कर रखी थी कि जब भी शंभूपुरा में श्याम मन्दिर का निर्माण होगा मेरी ओर से 2,22,222 रुपये सहयोग राशि लिख लीजिए।

बच्चों से था सबसे ज्यादा प्रेम

कोठारी को बच्चो से काफी लगाव था कोई भी बच्चा उनकी दुकान पर जाता बिना चोकलेट दिए नही जाने देते साथ ही बच्चो से वो हमेशा बहुत अधिक स्नेह रखते थे।

सरल स्वभावी, निर्मल ह्र्दयी पुण्यात्मा थे कोठारी

कोठारी के चहरे पर गुस्सा किसी को कभी देखने को नही मिला वो हमेशा सरल स्वभावी, निर्मल ह्र्दयी ओर पुण्यात्मा रहे है, उनकी होटल पर कोई अनजान भी चला जाता और नाश्ता करने के बाद उसके पास पैसे नही होते तो बोलते कोई बात नही जाओ भगवान का दिया सबकुछ तो है मेरे पास फिर क्या चाइये।

उनकी होटल दूर दराज तक प्रसिद्ध

2002 में शंभूपुरा में आये हेमंत कोठारी ने जीवन के शुरुआती दिनों में काफी संघर्ष किया, पहले नाकोड़ा रेस्टोरेंट किराए की दुकानों में चली, उसके बाद परिश्रम कर खुद के दम पर एक बहुत बड़ी होटल खुद की बनाई, नाकोड़ा रेस्टोरेंट की आसपास ही नही बल्कि दूर दराज तक प्रसिद्धि फैली हुई है लोग चाहे मंदसौर से चलकर आ रहे हो या इधर जयपुर से जो जानते यही सोचकर निकलते की शंभूपुरा में नाकोड़ा पर नाश्ता जरूर करेंगे, उनके यहाँ की शुद्ध मिठाईयां, जामुन, कचोरी चाय सभी हमेशा पूर्ण रूप से स्वच्छता ओर शुद्धता पर खरी उतरी है इसीलिए सबकी पहले पसदं हमेशा नाकोड़ा रेस्टोरेंट रही है, यही वहज रही कि कोठारी को लोग उनके नाम से कम और नाकोड़ा जी के नाम से ज्यादा पहचानने लगे।

गणतंत्र दिवस पर आसपास के सभी स्कूलों में बांटे मिठाई के डिब्बे

गणतंत्र दिवस पर सरकार भी बच्चों को एक या दो लड्डू देकर अतिश्योक्ति कर लेती है लेकिन भामाशाह हेमन्त कोठारी सरकार से भी 4 कदम आगे और बड़े दिल वाले निकले और 26 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस के अवसर पर उन्होंने उनके हाथ से शंभूपुरा के आसपास के दर्जनों स्कूलों में जाकर सेकड़ो मिठाई के डिब्बे बच्चो को देखर गणतंत्र दिवस की खुशियां बच्चो संग मनाई।

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