स्मार्ट हलचल|बांसवाड़ा, 24 जनवरी। माही टॉक फेस्ट के अंतर्गत हरिदेव जोशी रंगमंच पर इतिहास, साहस और स्वाभिमान से ओतप्रोत नाटक ‘अभयारानी अबक्का’ का पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र उदयपुर के सौजन्य से प्रभावशाली मंचन किया गया। प्रसिद्ध लेखक दीपक भारद्वाज द्वारा लिखित इस नाटक ने दर्शकों को वीरता, नारी नेतृत्व और राष्ट्र स्वाभिमान की प्रेरक गाथा से रूबरू कराया।
नाटक में 16वीं शताब्दी की अद्वितीय योद्धा रानी अबक्का देवी के संघर्ष, साहस और विदेशी आक्रांताओं के विरुद्ध उनके अडिग प्रतिरोध को सशक्त अभिनय, सटीक संवादों और भावपूर्ण प्रस्तुति के माध्यम से जीवंत किया गया। मंच पर कलाकारों की दमदार अदायगी, पृष्ठभूमि संगीत और प्रकाश संयोजन ने दर्शकों को उस ऐतिहासिक कालखंड में पहुंचा दिया।
हरिदेव जोशी रंगमंच दर्शकों की तालियों से बार-बार गूंज उठा। नाटक ने यह संदेश दिया कि नेतृत्व, शौर्य और राष्ट्रभक्ति किसी एक काल या लिंग तक सीमित नहीं होती, बल्कि वे हर युग में प्रेरणा का स्रोत बनती हैं।
माही टॉक फेस्ट के इस नाट्य मंचन ने न केवल दर्शकों को ऐतिहासिक चेतना से जोड़ा, बल्कि युवाओं में सांस्कृतिक विरासत और नायिकाओं के योगदान के प्रति सम्मान की भावना को भी प्रबल किया। यह प्रस्तुति फेस्ट की थीम के अनुरूप विचार, संस्कृति और स्वाभिमान का सशक्त संगम साबित हुई।
इस अवसर पर शिक्षाविद प्रदीप कोठारी पर्यावरणविद डॉ. रागिनी शाह माही टॉक फेस्ट के मेंटर मदन मोहन टांक, कोऑर्डिनेटर, माही टॉक फेस्ट डॉ. कमलेश शर्मा, वरिष्ठ रंगकर्मी जगन्नाथ तेली ने कलाकारों का अभिनंदन किया। अतिथियों ने नाटक की विषयवस्तु, प्रस्तुति और ऐतिहासिक चेतना को प्रेरणादायी बताते हुए कहा कि ऐसे मंचन युवाओं को अपने गौरवशाली अतीत, नारी शक्ति और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने माही टॉक फेस्ट को वागड़ अंचल में वैचारिक और सांस्कृतिक जागरण का महत्वपूर्ण प्रयास बताया। कार्यक्रम का संचालन रंगकर्मी सतीश आचार्य ने किया।
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*माही टॉक फेस्ट में मलखम्भ का रोमांच, हरिदेव जोशी रंगमंच पर दिखी शक्ति, संतुलन और साधना की अद्भुत छटा*
बांसवाड़ा, 24 जनवरी। माही टॉक फेस्ट के अंतर्गत हरिदेव जोशी रंगमंच पर भारतीय परंपरागत खेल-कला मलखम्भ का भव्य और रोमांचक प्रदर्शन किया गया। रतलाम से आए प्रख्यात मलखम्भ कलाकार अर्जुन कुमार के नेतृत्व में एक दर्जन से अधिक कलाकारों ने अपने अद्वितीय कौशल, संतुलन और शारीरिक सामर्थ्य का ऐसा प्रदर्शन किया कि दर्शक मंत्रमुग्ध रह गए।
कार्यक्रम के दौरान कलाकारों ने कठिन आसनों, तेज गति वाले करतबों और अनुशासित तालमेल के साथ मलखम्भ की विविध विधाओं को प्रस्तुत किया। ऊँचे खंभे पर निर्भीकता से किए गए अभ्यासों ने भारतीय योगिक परंपरा, साहस और साधना की गहरी झलक दिखाई। हर प्रस्तुति पर रंगमंच तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
इस मलखम्भ प्रदर्शन ने यह संदेश दिया कि भारत की पारंपरिक खेल विधाएं केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि मानसिक संतुलन, एकाग्रता और संस्कारों की जीवंत पाठशाला हैं। माही टॉक फेस्ट के मंच से इस तरह की प्रस्तुतियों ने युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने और भारतीय खेल परंपराओं को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
मलखम्भ कलाकारों की ऊर्जावान प्रस्तुति ने माही टॉक फेस्ट को कला, संस्कृति और शारीरिक साधना के अद्भुत संगम के रूप में स्थापित कर दिया।
कलाकारों का सम्मान पर्यावरणविद डॉ. रागिनी शाह, गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय के डॉ. राकेश डामोर और डॉ. लोकेंद्र कुमार ने किया। कार्यक्रम का संचालन रंगकर्मी सतीश आचार्य ने किया।
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