कानपुर के होली गंगा मेले में चले हास्य- व्यंग के तीर

स्मार्ट हलचल|

*—— जन प्रतिनिधि – —–*
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*रमेश अवस्थी :*
सभी जानते मेरे भाई।
किसके बल पर मैंने पाई॥

*देवेन्द्र भोले :*
बड़े जुगाड़ से पाया पार।
नहीं तो निश्चय जाता हार॥

*सत्यदेव पचौरी :*
समय सभी का आता है।
वही मुझे तड़पता है॥

*सतीश महाना:*
उसने तो पक्का निपटाया।
तभी नहीं मंत्री बन पाया॥

*अरुण पाठक :*
मेरे ईश्वर यही मनाऊं।
एक बार मंत्री बन जाऊं॥

*प्रकाश पाल :*
मुझको भी तो समझो यार।
सीट का मतलब कई हजार॥

*मानवेंद्र सिंह*
समझ कहां वे आते हैं।
जो काम से दाम बनाते हैं॥

*महेश त्रिवेदीः*
मेरी सत्ता, मेरा खेल।
सच में रहा करोड़ों पेल॥

*सुरेन्द्र मैथानी:*
मुझको भी यह ज्ञान है।
किसका रखना ध्यान है॥

*अभिजीत सांगाः*
भइया हम तो खुला बताते।
मिटटी से भी बहुत कमाते॥

*नीलिमा कटियारः*
मैं भी भाई सत्य बताऊं।
बिल्कुल अंदर-अंदर खाऊं॥

*सलिल विश्नोई:*
अंदर-अंदर करूं प्रहार।
भूला नहीं लट्ठ की मार॥

*राहुल बच्चा सोनकरः*
मैं भी भैया सही बताता।
बड़े जतन से काम बनाता॥

*प्रतिभा शुक्ला :*
है चालाकी उनसे मेल।
मेरा भी है तगड़ा खेल॥

*अमिताभ बाजपेईः*
मुश्किल से फिर पाई यार।
काफी कुछ देता हूं मार॥

*इरफान सोलंकी:*
खत्म हो गया मेरा खेल।
क्या फिर जाना है जेल॥

*नसीम सोलंकी :*
क्या वह हमें बताएंगे।
कबतक मुझे सतायेंगे॥

*मो. हसन रूमीः*
भाई सच यह बता रहा हूं।
सीट के बल पर कमा रहा हूं॥

*सरोज कुरील :*
पता नहीं फिर पाएंगे।
क्यों फिर नहीं कमाएंगे॥

*प्रमिला पांडेय :*
फेल विरोधी की हर चाल।
चारो ओर माल ही माल॥

*विजय कपूर :*
समय बदलता निश्चिय जाये।
सब कुछ ईश कृपा करवाये॥

*अनिल दीक्षित :*
सेवा पाल काम है आई।
उसने ही कुर्सी दिलवाई॥

*शिवराम सिंह :*
ईश महान महाना भाई।
तभी तो मुझको भी मिल पाई॥

*अजय कपूर :*
समय पर ही पाना।
बस कर्म किए जाना॥

*उपेन्द्र पासवान :*
पूर्व विधायक तो क्या भाई।
इस कुर्सी बहुत कमाई॥

*स्वप्निल वरुण :*
कर्म भाग्य जब साथ निभाए।
मेरे जैसा ही फल पाए॥

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*कमिश्नरेट पुलिस*
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*एडीजी जोन:*
निज कर्तव्य निभाना आये।
ईश्वर केवल शुभ करवाये॥

*पुलिस कमिश्नरः*
सेवा धर्म निभाते जाते।
जनहित राह सदा अपनाते॥
क्रिमिनल गर्दन रहे मरोड़।
इनका नहीं कोई है जोड़॥

*जेसीपी एल ओ :*
ड्यूटी वही पुराना खेल।
रखना आए सबसे मेल॥

*जेसीपी हेड क्वाटर*:
समझ ना पाऊं।
क्या कर जाऊं॥

*आई जी रेंजः*
जिनसे – जिनसे नाता है।
काफी कुछ हो जाता है।I

*डीसीपी साउथ :*
जो शुभ वही कराना है।
बार बार ना पाना है॥

*डीसीपी पश्चिम :*
सरल नहीं है राह हमारी
खेल रहा जनहित में पारी॥

*डीसीपी पूर्वी :*
ईश्वर काम बनाता है।
काफी कुछ हो जाता है॥

*डीसीपी सेंट्रल :*
अपना है कर्तव्य निभाना।
जैसे भी हो काम बनाना॥

*डीसीपी ट्राफिक :*
केवल सही कराना है।
और नहीं कुछ पाना है॥

*डीसीपी क्राइम*:
कैसे पाऊं भाई पार।
कुछ अच्छी, बाकी बेकार॥

*डीसीपी हेड क्वाटर*:
मेरी तो कुछ समझ ना आये।
जो चाहे ईश्वर करवाये॥

*एसपी कानपुर देहात*
जो सम्भव वह होता जाये।
पता नहीं नम्बर कब आये॥

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*जिला प्रशासन*
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*कमिश्नर प्रशासन :*
आगे बढ़ कर पाना है।
काफी कुछ कर जाना है॥

*जिलाधिकारी:*
सम्भव सभी कराते जाना।
केवल निज कर्तव्य निभाना॥

*वीसी केडीए:*
खेल निरंतर होता जाए।
अक्सर लाख करोड़ दिखाये॥

*आयुक्त नगर निगम:*
जबतक भाई न जाऊंगा।
तब तक खुला कमाऊंगा॥

*एडीएम सिटी*:
बहुत मजे हैं मेरे यार।
सबको मौका ,सबको प्यार॥

*ए डी एम राशनिंग*:
मेरी बात झूठ ना भाई।
कई लाख हर माह कमाई॥

*डी एस ओ* :
मेरा भाई नहीं है जोड़।
हर माह लगभग सवा करोड़॥

*सी एम ओ*
मेरी भी बन आई है।
प्रतिदिन लाख कमाई है॥

*एम डी केस्को:*
सत्य समझ तू भाई जाये।
कुर्सी भारी लाभ दिलाये॥

*आर टी ओ :*
मेरे आगे सारे फेल।
हर दिन हो लाखों में खेल॥

: :प्रस्तुति: :
*सुनील बाजपेई*
कवि, गीतकार,
लेखक एवं वरिष्ठ पत्रकार
कानपुरI 7985473020