सांवलिया सेठ प्राकट्य स्थल की पहचान को लेकर बागुंड ग्रामवासियों ने उठाए सवाल, अनियमितताओं की जांच की मांग

सांवलिया सेठ प्राकट्य स्थल की पहचान को लेकर बागुंड ग्रामवासियों ने उठाए सवाल, अनियमितताओं की जांच की मांग

मंदिर के नाम में ‘बागुंड-भादसोड़ा’ जोड़ने का आधार पूछा; ट्रस्ट, चढ़ावे, आय-व्यय और संपत्तियों की निष्पक्ष जांच की मांग

चित्तौड़गढ़, स्मार्ट हलचल। श्री सांवलिया सेठ प्राकट्य स्थल मंदिर बागुंड की वास्तविक पहचान और मंदिर की व्यवस्थाओं को लेकर बागुंड ग्रामवासियों ने सवाल उठाते हुए जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। ग्रामवासियों ने मंदिर की पहचान को यथावत रखने के साथ ट्रस्ट एवं प्रबंधन व्यवस्था, चढ़ावे व भंडार राशि, आय-व्यय, मंदिर की भूमि और संपत्तियों सहित पूर्व में धरना-प्रदर्शन के दौरान उठाई गई मांगों पर शीघ्र कार्रवाई की मांग की।

ज्ञापन में ग्रामवासियों ने कहा कि श्री सांवलिया सेठ प्राकट्य स्थल मंदिर बागुंड ग्राम क्षेत्र में स्थित धार्मिक स्थल है। इसके बावजूद मंदिर की पहचान और नाम के साथ ‘बागुंड-भादसोड़ा’ शब्द का प्रयोग किए जाने को लेकर उन्होंने आपत्ति जताई है। ग्रामवासियों का कहना है कि इस संबंध में सरकारी अभिलेखों, देवस्थान विभाग के रिकॉर्ड, ट्रस्ट दस्तावेजों और राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।

नाम में ‘भादसोड़ा’ जोड़ने का आधार सामने लाने की मांग

ग्रामवासियों ने मांग की कि देवस्थान विभाग एवं अन्य सरकारी अभिलेखों में मंदिर का आधिकारिक नाम क्या दर्ज है, इसकी जांच की जाए। साथ ही ‘बागुंड’ के साथ ‘भादसोड़ा’ शब्द किस आधार पर जोड़ा गया और इसके पीछे कोई प्रमाण या दस्तावेज है तो उसे सार्वजनिक किया जाए।

ज्ञापन में बागुंड और भादसोड़ा स्थित धार्मिक स्थलों की पहचान को अलग-अलग स्पष्ट करने की मांग भी की गई है। ग्रामवासियों ने कहा कि भादसोड़ा में भी श्री सांवलिया सेठ का अलग धार्मिक स्थल/मंदिर होने की जानकारी है, ऐसे में दोनों स्थलों की पहचान और रिकॉर्ड की स्थिति स्पष्ट होना आवश्यक है।


ट्रस्ट व्यवस्था और 40 वर्षों से चुनाव नहीं होने का दावा

ग्रामवासियों ने मंदिर के ट्रस्ट एवं प्रबंधन व्यवस्था की निष्पक्ष जांच की मांग की है। इसके तहत ट्रस्ट पंजीयन, बैठकों की कार्यवाही, प्रस्ताव एवं प्रबंधन से जुड़े दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की गई। ज्ञापन में दावा किया गया कि पिछले करीब 40 वर्षों से ट्रस्ट के चुनाव नहीं हुए हैं और आय-व्यय का विवरण भी सार्वजनिक नहीं किया जाता है।

चढ़ावे और संपत्तियों की वित्तीय पारदर्शिता की मांग

ज्ञापन में मंदिर में आने वाली चढ़ावा राशि एवं भंडार राशि के साथ आय-व्यय का पूरा विवरण जांच के दायरे में लेने की मांग की गई। मंदिर की दुकानों एवं अन्य संपत्तियों से होने वाली आय, मंदिर की भूमि तथा अन्य संपत्तियों के रिकॉर्ड की भी जांच कराने की मांग रखी गई है।

ग्रामवासियों ने कहा कि सरकारी अभिलेखों, ट्रस्ट दस्तावेजों, राजस्व रिकॉर्ड और वित्तीय लेखों के आधार पर सभी बिंदुओं का सत्यापन किया जाए। यदि जांच में कोई अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए तथा पूरी कार्रवाई की जानकारी ग्रामवासियों को उपलब्ध कराई जाए।