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अगर मेरे साथ कुछ हुआ तो…’, राजवर्धन सिंह परमार ने जताया जान का खतरा, लगाए गंभीर आरोप

(हरिप्रसाद शर्मा)

अजमेर/स्मार्ट हलचल|अजमेर दरगाह विवाद को लेकर चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है। अजमेर न्यायालय में दरगाह में हिंदू शिव मंदिर होने को लेकर याचिका दायर करने वाले महाराणा प्रताप सेना के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष राजवर्धन सिंह परमार ने अपनी जान को खतरा बताते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। परमार का कहना है कि अजमेर दरगाह उनका पवित्र हिंदू मंदिर है और इस मुद्दे को उठाने के बाद से उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं।

राजवर्धन सिंह परमार ने लगाए गंभीर आरोप

राजवर्धन सिंह परमार ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र स्थित “हज़रत ख्वाजा वेलफेयर फोरम” से जुड़े कुछ लोग एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं और उनके खिलाफ माहौल बना रहे हैं। उन्होंने मीडिया को जारी बयान में कहा कि इससे पहले 29 मई 2022 को भी इसी संगठन से जुड़े कुछ लोगों ने उनके खिलाफ अजमेर के एक थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। परमार के अनुसार उस दौरान उनके खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया था और जान से मारने की धमकियां भी दी गई थीं। उन्होंने बताया कि उस समय उन्होंने पूरे मामले की जानकारी पुलिस और प्रशासन को दी थी, ताकि किसी भी तरह की अनहोनी से बचा जा सके।

उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2022 में इस मामले को लेकर उन्होंने दिल्ली के संसद भवन थाना क्षेत्र में भी एफआईआर दर्ज करवाई थी। परमार का आरोप है कि अब वही लोग फिर से सक्रिय होकर उन्हें डराने-धमकाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले भी उन पर कई बार हमले हो चुके हैं, जिसके चलते उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता है। राजवर्धन सिंह परमार ने अजमेर पुलिस अधीक्षक, राजस्थान सरकार, गृह मंत्रालय और केंद्र सरकार से सुरक्षा मुहैया कराने की मांग की है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यदि भविष्य में उनके साथ किसी भी तरह की कोई अनहोनी होती है तो इसके लिए हज़रत ख्वाजा वेलफेयर फोरम महाराष्ट्र से जुड़े लोग जिम्मेदार होंगे।

‘मुझे धमकियां दी जा रही हैं’

परमार ने कहा, ‘मैं संवैधानिक और कानूनी तरीके से अपनी बात रख रहा हूं, लेकिन इसके बावजूद मुझे धमकियां दी जा रही हैं और डर का माहौल बनाया जा रहा है। मेरी मांग है कि प्रशासन इस पूरे मामले को गंभीरता से ले और मेरी सुरक्षा सुनिश्चित करे।’ उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी भी धर्म या धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है, बल्कि ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर अपनी बात रखना है। साथ ही उन्होंने प्रशासन से अपील की कि ऐसे संवेदनशील मामलों में निष्पक्ष जांच कर कानून-व्यवस्था बनाए रखी जाए। फिलहाल इस बयान के बाद अजमेर में दरगाह विवाद को लेकर एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि प्रशासन की ओर से अब तक इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन परमार के बयान के बाद सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ाई जा सकती है।

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