एसडीएम सदर की कार्रवाई, महंत से नहीं दिखे कोई कागजात; मंदिर की जमीन पर अधिकार को लेकर बढ़ा विवाद
इटावा। स्मार्ट हलचल|जनपद केऐतिहासिक चर्चित टिक्सी महादेव मंदिर की जमीन पर अवैध निर्माण को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। मंदिर के मंच व दुकान के ऊपर हॉल के निर्माण की शिकायत मिलने पर एसडीएम सदर ने मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगा दी। जांच के दौरान महंत शैलेन्द्र मिश्रा निर्माण कार्य से संबंधित कोई वैध कागजात प्रस्तुत नहीं कर सके।
स्थानीय लोगों के अनुसार शैलेन्द्र मिश्रा को केवल तीन वर्ष के लिए मंदिर में पूजा-आरती कराने के उद्देश्य से रखा गया था, लेकिन उन्होंने मंदिर की भूमि पर अपने अधिकार जताते हुए निर्माण कार्य शुरू करा दिया। आरोप है कि मंदिर के मुख्य गेट के पास स्थित खाली फील्ड में दुकानों के ऊपर बने मंच को हटाकर वहां हॉल का निर्माण कराया जा रहा था।
सूत्रों के अनुसार निर्माण कार्य को जल्द पूरा करने के लिए बड़ी संख्या में लेबर और मिस्त्री लगाए गए थे। आसपास के लोगों को जब निर्माण पर संदेह हुआ तो उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत कर दी। शिकायत के बाद एसडीएम सदर, तहसीलदार, नायब तहसीलदार और लेखपाल की टीम मौके पर पहुंची और निर्माण कार्य रुकवा दिया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर और उससे जुड़ी जमीन उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व विभाग लखनऊ के अधीन बताई जाती है। जिसके दो बोर्ड भी लगाये गए है। इसके बावजूद इसे निजी जमीन बताकर कथित रूप से किराये पर देने के उद्देश्य से हॉल का निर्माण कराया जा रहा था। यही नहीं मंदिर की ऐतिहासिक दीवारों पर भी रत्न, रुद्राक्ष और कुंडली निर्माण से जुड़े पोस्टर लगाए गए हैं। आरोप है कि मंदिर परिसर में निजी स्कूलों के बोर्ड भी लगाए गए हैं, जिससे मंदिर परिसर का स्वरूप प्रभावित हो रहा है।
जब मीडियाकर्मियों ने महंत शैलेन्द्र मिश्रा से निर्माण कार्य के संबंध में पूछताछ की तो वह कोई कागजात नहीं दिखा सके। बताया जाता है कि उन्होंने मीडियाकर्मियों से कहा, “तुम्हें जो खबर चलानी हो चला दो, मैं संघ से जुड़ा हूँ, 20 लोगों को तुम्हारे पीछे लगा दूंगा। मेरे पास कोई कागज नहीं है, मैं तो शिवशंकर तिवारी के कहने पर निर्माण करवा रहा हूँ।”
इसके बाद वह “वीडियो बना लो” कहते हुए वहां से चले गए। वहीं कैलाश उन्नत कारणी ट्रस्ट के सचिव शिव शंकर तिवारी का कहना है कि संबंधित जमीन ट्रस्ट की संपत्ति है और सभी सदस्यों की सहमति से निर्माण कराया जा रहा था। हालांकि ट्रस्ट को जमीन कब और किसके द्वारा दी गई, इस संबंध में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से वहां ट्रस्ट का कोई बोर्ड भी नहीं लगा है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मंदिर और उससे जुड़ी जमीन को लेकर निजीकरण और कब्जे की आशंका पैदा हो गई है। लोगों ने प्रशासन और राजस्व विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है, ताकि मंदिर की जमीन और प्रबंधन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
